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गल्फार कंपनी कार्यालय के एग्रीमेंट को लेकर विवाद
Updated Tue, 06 Mar 2018 12:20 AM IST
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सितारगंज में पीलीभीत मार्ग में किराए पर जमीन लेकर बनाए गए गल्फार कंपनी के कार्यालय और खनन सामग्री भंडारण के एग्रीमेंट को लेकर कंपनी और किसान के बीच विवाद हो गया। एसडीएम और सीओ की हस्तक्षेप के बाद किसान और कंपनी अफसरों के बीच बैठक हुई और अप्रैल माह तक के एग्रीमेंट पर सहमति बनी।
एनएच-74 की निर्माण कंपनी गल्फार का यहां के मलपुरी गांव में पांच किसानों की भूमि पर कार्यालय और खनन सामग्री का भंडारण है। गांव के किसान और भू-स्वामी जगतार सिंह और उसके भाई ने आरोप लगाया कि कंपनी ने अक्तूबर 2017 तक का किराया नहीं दिया है। इसलिए उसने एग्रीमेंट कराने से मना कर दिया और कंपनी अधिकारियों को जमीन खाली करने को कहा। मामला एसडीएम के दरबार में पहुंचा तो सोमवार को एसडीएम विनोद कुमार, सीओ हिमांशु शाह और कोतवाल योगेश चंद्र उपाध्याय ने गल्फार कंपनी के कार्यालय का निरीक्षण किया और फिर दोनों पक्षों के साथ वार्ता की। तय हुआ कि अप्रैल तक कार्यालय और भंडारण के लिए जमीन कंपनी के पास रहेगी। उसके बाद खाली कर दी जाएगी। किसान को किराये के करीब 2.11 लाख रुपये अदा नहीं किए गए थे, जिसके लिए कंपनी अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर जगतार व उसके भाई खाते में रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद दोनों पक्षों ने दो माह के लिए एग्रीमेंट पर सहमति जताई। वहां कंपनी के पीके चौधरी, मंजीत सिंह ज्ञानी आदि थे।
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एनएच-74 की निर्माण कंपनी गल्फार का यहां के मलपुरी गांव में पांच किसानों की भूमि पर कार्यालय और खनन सामग्री का भंडारण है। गांव के किसान और भू-स्वामी जगतार सिंह और उसके भाई ने आरोप लगाया कि कंपनी ने अक्तूबर 2017 तक का किराया नहीं दिया है। इसलिए उसने एग्रीमेंट कराने से मना कर दिया और कंपनी अधिकारियों को जमीन खाली करने को कहा। मामला एसडीएम के दरबार में पहुंचा तो सोमवार को एसडीएम विनोद कुमार, सीओ हिमांशु शाह और कोतवाल योगेश चंद्र उपाध्याय ने गल्फार कंपनी के कार्यालय का निरीक्षण किया और फिर दोनों पक्षों के साथ वार्ता की। तय हुआ कि अप्रैल तक कार्यालय और भंडारण के लिए जमीन कंपनी के पास रहेगी। उसके बाद खाली कर दी जाएगी। किसान को किराये के करीब 2.11 लाख रुपये अदा नहीं किए गए थे, जिसके लिए कंपनी अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर जगतार व उसके भाई खाते में रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद दोनों पक्षों ने दो माह के लिए एग्रीमेंट पर सहमति जताई। वहां कंपनी के पीके चौधरी, मंजीत सिंह ज्ञानी आदि थे।
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