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भाजपा के मर्म पर चोट कर गए ‘प्रकाश पांडे’
Updated Wed, 10 Jan 2018 02:29 AM IST
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हल्द्वानी। व्यवसायी प्रकाश पांडे की मौत की सीधी चोट भाजपा के मर्मस्थल पर ही हुई है। प्रकाश पांडे का देहरादून जाकर जनता मिलन में जहर पीकर पहुंचना साबित कर रहा है कि शिकायतों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की कारगर व्यवस्था और संगठन की ‘सेफ्टी वाल्व’ की भूमिका पटरी पर नहीं है। इसके बाद के हालात बता रहे हैं कि भाजपा अपनी इस असफलता को भांपने से भी चूक गई और अब तूफान को सिर झुकाकर गुजर जाने देने में ही भलाई समझ रही है।
शिकायतों के निवारण के लिए भाजपा जनता मिलन कार्यक्रम शुरू किया था। इसके अलावा यह भी तय किया गया था कि मुख्यमंत्री का जनता मिलन कार्यक्रम हल्द्वानी में भी होगा। नैनीताल जिले का प्रभारी मंत्री हरक सिंह को बनाया गया। प्रकाश पांडे का देहरादून जाना यह भी साबित कर रहा है कि मंत्रियों और नेताओं की कुमाऊं में सहज उपलब्धता का विश्वास भाजपा लोगों को नहीं दिला पाई है। जिलों का मंत्रियों को प्रभार देना भी काम नहीं कर पा रहा है।
सत्ताधारी दल को सरकार के ‘सेफ्टी वाल्व’ के रूप में भी देखा जाता है। संगठन स्थानीय समस्याओं और बड़े मामलों को सरकार तक पहुंचाने और दबाव बनाकर समस्या की आंच को कम करने की भूमिका भी निभाती है। पहले अंतरराज्यीय बस अड्डा, इसके बाद मंडी और अब जहर कांड बता रहा है कि भाजपा इस मामले में चोट खा गई। इस मामले की संवेदनशीलता को कम आंका गया। प्रकाश पांडे के अस्पताल में भरती होने केबाद से ही भाजपा नेता यह मान रहे थे कि पांडे की हालत में सुधार होगा और भाजपा इस समस्या को चुप रहकर सुलझा लेगी।
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इसके उलट अभी तक खामोश बैठा ट्रांसपोर्ट व्यवसायी खुलकर मैदान में आ गया है। इनके साथ अन्य व्यापारी भी खुलकर सामने आ गए हैं। इस पर भाजपा के पास समस्या से पार पाने की कोई रणनीति भी नहीं है। एक भाजपा नेता के मुताबिक इस मामले को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट खुद ही संभाल रहे हैं।
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शिकायतों के निवारण के लिए भाजपा जनता मिलन कार्यक्रम शुरू किया था। इसके अलावा यह भी तय किया गया था कि मुख्यमंत्री का जनता मिलन कार्यक्रम हल्द्वानी में भी होगा। नैनीताल जिले का प्रभारी मंत्री हरक सिंह को बनाया गया। प्रकाश पांडे का देहरादून जाना यह भी साबित कर रहा है कि मंत्रियों और नेताओं की कुमाऊं में सहज उपलब्धता का विश्वास भाजपा लोगों को नहीं दिला पाई है। जिलों का मंत्रियों को प्रभार देना भी काम नहीं कर पा रहा है।
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सत्ताधारी दल को सरकार के ‘सेफ्टी वाल्व’ के रूप में भी देखा जाता है। संगठन स्थानीय समस्याओं और बड़े मामलों को सरकार तक पहुंचाने और दबाव बनाकर समस्या की आंच को कम करने की भूमिका भी निभाती है। पहले अंतरराज्यीय बस अड्डा, इसके बाद मंडी और अब जहर कांड बता रहा है कि भाजपा इस मामले में चोट खा गई। इस मामले की संवेदनशीलता को कम आंका गया। प्रकाश पांडे के अस्पताल में भरती होने केबाद से ही भाजपा नेता यह मान रहे थे कि पांडे की हालत में सुधार होगा और भाजपा इस समस्या को चुप रहकर सुलझा लेगी।
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इसके उलट अभी तक खामोश बैठा ट्रांसपोर्ट व्यवसायी खुलकर मैदान में आ गया है। इनके साथ अन्य व्यापारी भी खुलकर सामने आ गए हैं। इस पर भाजपा के पास समस्या से पार पाने की कोई रणनीति भी नहीं है। एक भाजपा नेता के मुताबिक इस मामले को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट खुद ही संभाल रहे हैं।