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रामनगर में वनवासियों की सुनवाई होगी
Updated Fri, 04 Aug 2017 02:22 AM IST
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रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड वन पंचायत संघर्ष मोर्चा और अखिल भारतीय वन जनश्रमजीवी यूनियन की बैठक में वन अधिकार कानून को प्रभावी बनाने की मांग की गई। इस दौरान वनाधिकार कानून 2006 के वन आश्रितों, समुदायों के वन अधिकारों के लिए कुमाऊं स्तरीय जनसुनवाई समिति का गठन किया गया।
बैठक में तराई केंद्रीय, तराई पूर्वी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अध्यक्षों द्वारा वन अधिकार कानून अधिनियम 2006 के तहत व्यक्तिगत, सामूहिक अधिकार पत्र भरने की कार्रवाई की जाएगी। इन पत्रों को समाज कल्याण विभाग में जमा किया जाएगा। अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि वनवासियों के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ है। कानून में अधिकारों की मान्यता मिलने के बावजूद लोग लाभान्वित नहीं हो सके हैं। यूनियन की उपाध्यक्षा रोमा ने बताया कि वन अधिकार कानून अधिनियम प्रभावी बनाना जरूरी है। इसके लिए रणनीति बनाई गई। बैठक में आठ अक्तूबर को रामनगर में जन सुनवाई की तिथि तय हुई। गोपाल लोधियाल, तरुण जोशी ने संचालन किया। इस दौरान राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी, मो. कासिम, महेश जोशी, हाजी कासिम, मो. शफी, चिंताराम, इंद्रजीत सिंह आदि थे।
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बैठक में तराई केंद्रीय, तराई पूर्वी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अध्यक्षों द्वारा वन अधिकार कानून अधिनियम 2006 के तहत व्यक्तिगत, सामूहिक अधिकार पत्र भरने की कार्रवाई की जाएगी। इन पत्रों को समाज कल्याण विभाग में जमा किया जाएगा। अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि वनवासियों के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ है। कानून में अधिकारों की मान्यता मिलने के बावजूद लोग लाभान्वित नहीं हो सके हैं। यूनियन की उपाध्यक्षा रोमा ने बताया कि वन अधिकार कानून अधिनियम प्रभावी बनाना जरूरी है। इसके लिए रणनीति बनाई गई। बैठक में आठ अक्तूबर को रामनगर में जन सुनवाई की तिथि तय हुई। गोपाल लोधियाल, तरुण जोशी ने संचालन किया। इस दौरान राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी, मो. कासिम, महेश जोशी, हाजी कासिम, मो. शफी, चिंताराम, इंद्रजीत सिंह आदि थे।
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