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उतरांचल टी कंपनी कौसानी से होगी 33,90,
Updated Fri, 23 Jun 2017 11:12 PM IST
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33.90 लाख बकाया वसूलने की कार्रवाई शुरू
गरुड़ (बागेश्वर)। उत्तराखंड शासन ने दो साल से बंद उत्तरांचल टी कंपनी प्राइवेट लि. कौसानी से 33,90,852 लाख रुपये की बकाया राशि वसूलने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। शासन के प्रमुख सचिव ने निदेशक चाय विकास बोर्ड से वसूली भू राजस्व की तरह वसूलने और कंपनी की आरसी काटने के निर्देश दिए हैं।
चाय की हरी पत्तियों के मूल्य को लेकर करीब दस वर्ष पहले उत्तरांचल टी कंपनी प्रा. लिमिटेड और चाय विकास बोर्ड के बीच करार हुआ था। इसके तहत कंपनी ने चाय विकास बोर्ड को सालों से चाय की पत्तियों का भुगतान नहीं किया था। चाय की हरी पत्तियों का मासिक भुगतान न होने पर कंपनी पर सरकार का 33,90,852 लाख रुपया बकाया है। चाय कंपनी ने लंबित भुगतान करने के बजाय कंपनी दो साल पहले बंद कर दी। कौसानी निवासी किशन सिंह खत्री ने भी दो माह पहले इस बारे में सूचना के अधिकार से जानकारी जुटाई थी। उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने निदेशक चाय विकास बोर्ड को कंपनी से बकाया धन की वसूली के निर्देश दिए है। इसके तहत बकाया वसूली भू राजस्व की तरह करने और कोलकाता की कंपनी के नाम आरसी काटने को भी कहा है। प्रमुख सचिव ने कहा है कि उत्तराखंड टी बोर्ड ने एमओयू के बिना भूमि कंपनी को चाय फैक्ट्री स्थापित करने के लिए दी है। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताया है।
जिलाधिकारी कार्यालय से आरसी वसूली का आदेश मिला है। इसका पालन कराया जा रहा है। वसूली की तैयारी चल रही है। इसमें जरूरी कार्रवाई के लिए कुछ समय लगेगा।
- दयाल चंद्र टम्टा, तहसीलदार, गरुड़।
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गरुड़ (बागेश्वर)। उत्तराखंड शासन ने दो साल से बंद उत्तरांचल टी कंपनी प्राइवेट लि. कौसानी से 33,90,852 लाख रुपये की बकाया राशि वसूलने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। शासन के प्रमुख सचिव ने निदेशक चाय विकास बोर्ड से वसूली भू राजस्व की तरह वसूलने और कंपनी की आरसी काटने के निर्देश दिए हैं।
चाय की हरी पत्तियों के मूल्य को लेकर करीब दस वर्ष पहले उत्तरांचल टी कंपनी प्रा. लिमिटेड और चाय विकास बोर्ड के बीच करार हुआ था। इसके तहत कंपनी ने चाय विकास बोर्ड को सालों से चाय की पत्तियों का भुगतान नहीं किया था। चाय की हरी पत्तियों का मासिक भुगतान न होने पर कंपनी पर सरकार का 33,90,852 लाख रुपया बकाया है। चाय कंपनी ने लंबित भुगतान करने के बजाय कंपनी दो साल पहले बंद कर दी। कौसानी निवासी किशन सिंह खत्री ने भी दो माह पहले इस बारे में सूचना के अधिकार से जानकारी जुटाई थी। उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने निदेशक चाय विकास बोर्ड को कंपनी से बकाया धन की वसूली के निर्देश दिए है। इसके तहत बकाया वसूली भू राजस्व की तरह करने और कोलकाता की कंपनी के नाम आरसी काटने को भी कहा है। प्रमुख सचिव ने कहा है कि उत्तराखंड टी बोर्ड ने एमओयू के बिना भूमि कंपनी को चाय फैक्ट्री स्थापित करने के लिए दी है। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताया है।
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जिलाधिकारी कार्यालय से आरसी वसूली का आदेश मिला है। इसका पालन कराया जा रहा है। वसूली की तैयारी चल रही है। इसमें जरूरी कार्रवाई के लिए कुछ समय लगेगा।
- दयाल चंद्र टम्टा, तहसीलदार, गरुड़।