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बदरी केदार मंदिर समिति को भंग करने के आदेश पर रोक
Updated Wed, 06 Sep 2017 02:16 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति को भंग करने के सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया है। शनिवार को न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की एकल पीठ ने यह आदेश पारित किया।
बदरी केदार मंदिर समिति को प्रदेश सरकार ने एक अप्रैल 2017 को भंग कर दिया था। सरकार के इसी आदेश को मंदिर समिति के सदस्य दिवाकर चमोली और दिनकर बाबुलकर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने मंदिर समिति को बहाल रखते हुए सरकार से उचित फैसला लेने को कहा था। सरकार ने आठ जून 2017 को फिर से समिति को भंग कर दिया था। मंदिर समिति ने फिर उच्च न्यायालय में सरकार के आदेश को चुनौती दी। 15 जून 2017 को एकलपीठ ने मंदिर समिति को बहाल करने का निर्देश जारी किया। एकलपीठ के इस आदेश को सरकार ने उच्च न्यायालय की खंड पीठ में चुनौती दी। सरकार की कोशिश यहां भी काम नहीं आई। खंड पीठ ने भी एकल पीठ के आदेश को सही मानते हुए एकलपीठ को शीघ्र सुनवाई के निर्देश दिए।
मंगलवार को न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने और बदरी केदार मंदिर समिति अधिनियम का आकलन करने के बाद सरकार के एक अप्रैल और आठ जून के आदेश को अधिनियम के विरुद्ध मानते हुए ख़ारिज कर दिया। इसी के साथ याचिका निस्तारित कर दी गई।
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बदरी केदार मंदिर समिति को प्रदेश सरकार ने एक अप्रैल 2017 को भंग कर दिया था। सरकार के इसी आदेश को मंदिर समिति के सदस्य दिवाकर चमोली और दिनकर बाबुलकर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने मंदिर समिति को बहाल रखते हुए सरकार से उचित फैसला लेने को कहा था। सरकार ने आठ जून 2017 को फिर से समिति को भंग कर दिया था। मंदिर समिति ने फिर उच्च न्यायालय में सरकार के आदेश को चुनौती दी। 15 जून 2017 को एकलपीठ ने मंदिर समिति को बहाल करने का निर्देश जारी किया। एकलपीठ के इस आदेश को सरकार ने उच्च न्यायालय की खंड पीठ में चुनौती दी। सरकार की कोशिश यहां भी काम नहीं आई। खंड पीठ ने भी एकल पीठ के आदेश को सही मानते हुए एकलपीठ को शीघ्र सुनवाई के निर्देश दिए।
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मंगलवार को न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने और बदरी केदार मंदिर समिति अधिनियम का आकलन करने के बाद सरकार के एक अप्रैल और आठ जून के आदेश को अधिनियम के विरुद्ध मानते हुए ख़ारिज कर दिया। इसी के साथ याचिका निस्तारित कर दी गई।
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