फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   nainital high court decision good for democracy

लोकतंत्र को बचाने में अहम है नैनीताल हाईकोर्ट का फैसला

Wed, 30 Mar 2016 11:12 AM IST
गिरीश रंजन तिवारी/ अमर उजाला, नैनीताल
गिरीश रंजन तिवारी/ अमर उजाला, नैनीताल Updated Wed, 30 Mar 2016 11:12 AM IST
विज्ञापन
nainital high court decision good for democracy
हाईकोर्ट भवन नैनीताल - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड हाईकोर्ट का निर्णय कई मामले में अहम है। संबंधित तीन पक्षों केंद्र सरकार, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (कांग्रेस सरकार) और बागी विधायकों को सीधे तौर पर कोई राहत दिए बगैर तीनों पक्षों को अपनी भूल सुधार का मौका मिला।

विज्ञापन


निर्णय से यह स्पष्ट है कि कोर्ट ने सभी पक्षों को समझने तथा उन्हें अपना पक्ष रखने का भरपूर मौका देने के बाद इस बेहद संवेदनशील तथा संवैधानिक मसले पर सभी पक्षों के लिए एक मिसाल प्रस्तुत की है। भले ही खंडपीठ के समक्ष या सुप्रीम कोर्ट में इस पर कोई भी अन्य निर्णय हो लेकिन तीनों पक्षों को कुछ न कुछ हासिल जरूर हुआ है।
विज्ञापन


इस प्रकरण में राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर केंद्र सरकार, सरकार की बहाली को लेकर प्रदेश सरकार तथा मताधिकार को लेकर बागी विधायकों का पक्ष विचारणीय था। कोर्ट में केंद्र की ओर से बार बार मुख्यत: यह दलील दी गई कि अंतरिम राहत के तौर पर किसी भी कोर्ट को राष्ट्रपति शासन पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। न्यायाधीश ने अपने निर्णय में राष्ट्रपति शासन पर रोक नहीं लगाई है जिससे कहीं न कहीं केंद्र सरकार को राहत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसी प्रकार पूर्व सीएम हरीश रावत के पक्ष में दलील दी गई कि राज्यपाल द्वारा 28 मार्च को विधानसभा में शक्ति परीक्षण के आदेश के बावजूद इसके ठीक एक दिन पहले राष्ट्रपति शासन लगाकर केंद्र ने लोकतंत्र का मखौल उड़ाया है तथा उनके पद पर बने रहने के संवैधानिक अधिकार का हनन किया है। यहां भी कोर्ट ने भले ही सरकार की बहाली का निर्णय नहीं दिया लेकिन शक्ति परीक्षण की अनुमति देकर हरीश रावत को राहत दी।

बागी विधायक अपनी सदस्यता निलंबित किए जाने को लेकर रोष में थे तथा मताधिकार के अपने अधिकार से वंचित किए जाने का आरोप लगा रहे थे। मतदान की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किए जाने का निर्देश देकर कोर्ट ने उनके पक्ष को भी मजबूती प्रदान की है।

कोर्ट ने राज्यपाल के निर्णय पर भी कोई हस्तक्षेप नहीं किया है बल्कि उनके 28 मार्च को विधानसभा में शक्ति परीक्षण के आदेश को ही लागू किया है केवल इसकी तिथि विस्तारित की है। इस तरह कोर्ट ने समस्त संबंधित पक्षों को महत्व दिया है। एक तरह से यह सभी पक्षों की जीत है।


यह स्थापित तथ्य है कि लोकतंत्र में राष्ट्रपति शासन अंतिम विकल्प है, जबकि राष्ट्रपति शासन के दौरान भी प्राथमिकता किसी सरकार की स्थापना की ही होती है। कोर्ट ने इस विकल्प का रास्ता भी खुला रखा है। निश्चय ही इस अत्यंत जटिल प्रकरण में कोर्ट ने संविधान पर गहन विचार के बाद संवैधानिक दायरे में लोकतंत्र की रक्षा को ही ध्यान में रखा है।

ऐसे में यह तय है कि इस प्रकरण का पटाक्षेप किसी भी रूप में हो हाईकोर्ट का मंगलवार का निर्णय भी एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed