{"_id":"f63606a4eb208a2a4f078e9dd2dfb7b7","slug":"muslim-wrote-badrinath-aarti","type":"story","status":"publish","title_hn":"...मुस्लिम ने लिखी थी भगवान बदरीनाथ की आरती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...मुस्लिम ने लिखी थी भगवान बदरीनाथ की आरती
अमर उजाला, विनय बहुगुणा, कर्णप्रयाग
Updated Thu, 12 Sep 2013 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवभूमि का जनपद चमोली कौमी एकता की मिसाल देता आ रहा है। ईद हो या दीपावली चाहे अन्य त्योहार में प्रेम और सौहार्द्व का माहौल देखने को मिलता है।
विज्ञापन
देशभक्त कवि इकलाब ने सारे जहां से अच्छा हिंन्दुस्तां हमारा, मजहब नहीं सिखाता आपास में बैर रखना..गीत में हिन्दुस्तान की एकता और अखंडता को बयां किया है।
विज्ञापन
पढें, केदारनाथः डमरू बजा नहीं, महाराज ने बजा दिया 'डंका'
विज्ञापन
इस गीत की महत्ता को चमोली ने खूब समझा। भगवान श्रीबदरीनाथ जी की आरती पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदित शोभितम, निकट गंगा बहत निर्मल, बदरीनाथ विशंभर... को लिखने का श्रेय भी जिले में नंदप्रयाग के रहने वाले बदरुद्दीन को है।
विशेष सहयोग देते हैं मुस्लिम
यही नहीं यहां रिश्तों की अनूठी जुगलबंदी धार्मिक आयोजनों में भी दिखती है। कर्णप्रयाग में पिछले तीन दशक से अधिक समय से रामलीला आयोजन हो रहा है, जिसमें कई मुस्लिम भाई अपना विशेष सहयोग देते हैं।
तस्वीरों में देखें...राजनीति के बीच केदारबाबा का 'महाभिषेक'
साज-सज्जा लेकर पात्रों को ट्रेनिंग देना यहां तक कि उनका मेकअप कर तैयार करने की जिम्मेदारी भी उनकी है। युवा व्यवसायी रहीम सिद्दीकी कहते हैं कि मजहब किसी को बैर करना नहीं सिखाता है।
धर्म एक करता है
धर्म एक करता है, किसी को तोड़ने या मारने का नहीं। जो भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, वे अपनी तुच्छ मानसिकता को बयां कर रहे हैं। ऐसे लोगों के विरुद्व कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पढें, केदारनाथः भक्तों के पांव पर सरकार का 'ब्रेक'
जिला पंचायत सदस्य भुवन नौटियाल कहते हैं कि पहाड़ में तो हिन्दु और मुस्लमान आपसी भाईचारे की मिसाल हैं। दोनों समुदायों की मेहनत और एकता से पहाड़ मजबूत है।
यह है आरती
पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम |
निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
शेष सुमिरन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वरम |
शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारणम |
जोग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर धूप दीप प्रकाशितम |
सिद्ध मुनिजन करत जै जै बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
यक्ष किन्नर करत कौतुक ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम |
श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
कैलाश में एक देव निंरजन शैल शिखर महेश्वरम |
राजयुधिष्ठिर करतस्तुति श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
श्री बद्री जी के पंच रत्न पढ्त पाप विनाशनम |
कोटि तीर्थ भवेत पुण्य प्राप्यते फलदायकम |