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डीएवी में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ का सिस्टम बंद

Wed, 03 Jul 2013 10:25 AM IST
देहरादून/ ब्यूरो
देहरादून/ ब्यूरो Updated Wed, 03 Jul 2013 10:25 AM IST
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merit based admission in DAV college
छात्र संख्या के लिहाज से सूबे का सबसे बड़ा कालेज डीएवी अब छात्र संख्या पर लगाम लगाने की तैयारी कर रहा है। विवि और मैनेजमेंट से मिले निर्देशों के तहत प्रथम वर्ष के दाखिलों में अब मेरिट को आधार बनाया जाएगा।
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अधिक एडमिशन नहीं दिए जाएंगे
अभी तक ‘पहले आओ, पहले पाओ’ सिस्टम चल रहा था। डीएवी पीजी कालेज में प्रथम वर्ष की अनुमन्य संख्या से इतर हर साल हजारों एडमिशन हो जाते थे। इसकी वजह से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। इस बार कालेज प्रशासन ने फैसला किया है कि अनुमन्य छात्र संख्या से अधिक एडमिशन नहीं दिए जाएंगे।
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प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन ने बताया कि गढ़वाल विवि ने 1997 में बीए प्रथम वर्ष में 1410, बीकॉम प्रथम वर्ष में 1200 और बीएससी प्रथम वर्ष में 1200 सीटों की अनुमति दी थी। इस बार इसे ही फॉलो किया जाएगा। प्रास्पेक्टस के साथ छात्र को एक मेरिट फॉर्म दिया जाएगा, जिसमें उसे अपनी हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में प्राप्त अंकों के साथ ही एनसीसी या एनएसएस या दूसरे अधिभार की जानकारी देनी होगी।
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जारी की जाएगी मेरिट लिस्ट
कालेज प्रशासन की ओर से मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी। जिसमें दाखिले के बाद बची सीटों के लिए दूसरी मेरिट जारी की जाएगी। मेरिट प्रक्रिया की पूरी कार्ययोजना 16 जुलाई को सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक के बाद तैयार की जाएगी। कालेज में रेगुलर कोर्स में दाखिलों के लिए प्रास्पेक्टस वितरण आठ जुलाई से शुरू होने जा रहा है।

कैसे लगेगी लगाम
डीएवी पीजी कालेज में हर साल प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के दाखिलों की संख्या 30 हजार पार कर जाती है। हर साल दाखिलों पर लगाम लगाने का प्रयास किया जाता है, लेकिन छात्र राजनीति के दबाव में मुश्किल हालात पैदा हो जाते हैं। छात्र संख्या को लेकर विधानसभा में भी सवाल उठ चुका है।


प्रशासन भी मानता है कि डीएवी की बेहिसाब छात्र संख्या की वजह से शहर में लॉ एंड ऑर्डर की समस्या उत्पन्न होती है।

एमए, एमएससी और एमकॉम में भी हम इस नियम को फॉलो करने जा रहे हैं। विभिन्न न्यायालयों से मिले निर्देशों और नैक एक्रिडिएशन के लिहाज से कॉलेज के पिछड़ेपन के चलते यह नियम लागू किया जाएगा।
- डा. देवेंद्र भसीन, प्राचार्य, डीएवी पीजी कॉलेज
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