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बोली पाटकर, सरकार है उत्तराखंड में तबाही की जिम्मेदार

Wed, 10 Jul 2013 08:20 PM IST
श्रीनगर/चमोली/ब्यूरो
श्रीनगर/चमोली/ब्यूरो Updated Wed, 10 Jul 2013 08:20 PM IST
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medha Patkar says the government responsible for destruction

आपदा की मार झेल रहे उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और चमोली जिले का दौरा कर लौट रही सामाजिक कार्यकर्ता और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटेकर ने आपदा को प्राकृतिक कम, लेकिन मानव जनित अधिक बताया है।

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पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि प्रभावित ग्रामीणों की आजीविका तथा विस्थापन के लिए सरकार को राजनैतिक इच्छाशक्ति दिखाने की जरूरत है।

गढ़वाल मंडल विकास निगम के यात्री विश्राम गृह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वयोवृद्ध समाज सेवी मेधा पाटेकर ने कहा कि उत्तराखंड के 60 प्रतिशत लोगों की आजीविका का साधन पर्यटन और तीर्थाटन है, जो बुरी तरह से प्रभावित हो गया है।
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जल विद्युत परियोजनाएं जिम्मेदार
मेधा पाटकर ने कहा कि उत्तराखंड में बेतरतीब ढंग से बन रही अंधाधुंध जल विद्युत परियोजनाओं तथा अन्य निर्माण कार्यों के मलबे ने ही इस आपदा में सबसे अधिक कहर ढाया है।
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पाटकर ने कहा कि गंगा तथा भागीरथी को 30-30 किमी. के जलाशयों में तब्दील किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने नदियों को सुरक्षित रखा जबकि यहां की सरकारें राज्य को एक भूखंड मानकर इसे बेचने पर तुली हैं।

अब राज्य के लोगों पर इस कदर आपदा आई है, तो यहां के लोगों के विस्थापन तथा आजीविका के लिए नियमों में ढिलाई बरतकर बसाहतें होनी चाहिए। गाद नदियां ला रही हैं, मलबा परियोजनाओं से आ रहा है फिर भी शासकीय संस्थाओं और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी इसकी सुध नहीं ली। इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रभावितों को दें उचित सहायता
नर्वदा बचाओ अभियान की नेत्री मेधा पाटेकर ने बुधवार को चमोली में आपदा प्रभावितों से मुलाकात की। उन्होंने चमोली के एसडीएम अवधेश कुमार सिंह को प्रभावितों की उचित देखरेख और सहायता देने की अपील की।


पाटेकर ने कहा कि अलकनंदा नदी पर निर्मित विष्णुप्रयाग जल विद्युत परियोजना बिना जांच-परख के बनाई गई है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी भी सरकार नहीं चेती तो बेकुसूर यूं ही मारे जाते रहेंगे।

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