उत्तराखंड विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट की 10 मुख्य बातें
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सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार मंगलवार को सुबह 11 बजे उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट शुरु हुआ तो दोहपर 12 बजे पूर्ण हो गया।
फ्लोर टेस्ट को ध्यान में रखते हुए विधानसभा क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया गया। विधानसभा से पांच सौ मीटर की दूरी तक जीरो जोन घोषित किया गया। फ्लोर टेस्ट को ध्यान में रखते हुए
विधानसभा के 500 मीटर जोन में एसओजी के जवान सिविल में तैनात किया गए। इन्हें वीडियो कैमरे दिए गए ताकि विस के बाहर की भी रिकॉर्डिंग की जा सके।
विधानसभा परिसर के अंदर किसी भी वाहन ने प्रवेश नहीं किया। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित विधायक ने भी पैदल ही विधानसभा के अंदर प्रवेश किया।
विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशों के मुताबिक विधानसभा परिसर में मोबाइल फोन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहे। कोई भी सदस्य मोबाइल फोन परिसर में नहीं ले गया।
11 बजे से दोपहर एक बजे तक उत्तराखंड से हटा राष्ट्रपति शासन
विधानसभा के अधिकारियों, कर्मचारियों और विधानसभा सदस्यों के अलावा कोई भी व्यक्ति विधानसभा परिसर में प्रवेश नहीं पाया।
विधानसभा परिसर में केवल विधायक और स्पीकर ने ही प्रवेश किया। कर्मचारी और पत्रकारों को परिसर के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया।
फ्लोर टेस्ट के दौरान पक्ष और विपक्ष अलग-अलग बैठे। सु्प्रीम कोर्ट द्वारा फ्लोर टेस्ट के लिए दो घंटे का समय दिया गया था, लेकिन एक घंटे में ही फ्लोर टेस्ट पूरा हो गया। सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया।
विधानसभा में हाथ उठाकर मतदान किया गया। फ्लोर टेस्ट की निगरानी करने के लिए छह कैमरे लगाए गए। फ्लोर टेस्ट के बाद मतों को सीलबंद लिफाफे में 11 मई को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा, जिसके बाद कोर्ट फैसला सुनाएगा।
उधर, फ्लोर टेस्ट में भाग लेने के लिए शुक्रवार से मसूरी के होटल में रुके कांग्रेस और पीडीएफ विधायक मंगलवार सुबह नौ बजे देहरादून पहुंचे।