{"_id":"570125974f1c1b8e1ac810de","slug":"land-transfer-to-the-ganga-beach-camping","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा किनारे बीच कैंपिग के लिए भूमि हस्तांतरण,मिली हरी झंडी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा किनारे बीच कैंपिग के लिए भूमि हस्तांतरण,मिली हरी झंडी
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 03 Apr 2016 07:45 PM IST
विज्ञापन
गंगा किनारे बीच कैंपिग
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगा किनारे बीच कैंपिग किए जाने के संबंध में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय ने वन भूमि हस्तांतरण के लिए हरी झंडी दे दी है। अभी 18 हेक्टेयर वन भूमि का गैर-वानिकी कार्य के लिए हस्तांतरण किया जा रहा है।
विज्ञापन
उत्तराखंड वन विकास निगम ने शासन को पत्र भेजकर इस संबंध में दिशा-निर्देश देने के लिए कहा है। प्रदेश में बीच कैंपिग नीति अभी तैयार नहीं हुई है। इसका ड्राफ्ट शासन में विचाराधीन है।
विज्ञापन
गंगा किनारे वन भूमि पर बीच कैंपिग करने के लिए शासन ने निजी कंपनियों पर रोक लगा दी है। शासन ने बीच कैंपिग कराने की जिम्मेदारी उत्तराखंड वन विकास निगम को दी है।
विज्ञापन
वन निगम का यह प्रस्ताव साइट पर है अपलोड
वन निगम ने इस योजना को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। सबसे पहले फारेस्ट राइट एक्ट के तहत वन भूमि को गैर वानिकी कार्य के लिए हस्तांतरित किया जा रहा है। 18 हेक्टेयर भूमि के हस्तांतरण के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। वन निगम का यह प्रस्ताव साइट पर अपलोड है।
उत्तराखंड वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक एसटीएस लेप्चा ने बताया कि दिशा-निर्देश प्राप्त करने के संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है।
बता दें कि बीच कैंपिग के संबंध में शासन ने अभी नीति तैयार नहीं की है। इसका ड्राफ्ट शासन में है। बीच कैंपिग की नीति का ड्राफ्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के निर्देशों के लिहाज से अपडेट किया जाना है।