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Kotdwar News: पुराना हरिद्वार मार्ग खस्ताहाल
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Iलोनिवि नहीं ले रहा सुध, जान जोखिम में डालकर हो रही आवाजाही
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Iपुराना हरिद्वार मार्ग (डिग्री कॉलेज-मवाकोट-कलालघाटी) की हालत लोनिवि दुगड्डा को हस्तांतरित होने के एक साल बाद भी नहीं सुधरी है। मोटाढाक में मालन नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद से इसी मार्ग को भाबर के लोग वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। हालात यह है कि ध्रुवपुर और सत्तीचौड़ के बीच दो रपटे बरसात से क्षतिग्रस्त पड़े हैं और संबंधित विभाग पैच वर्क कर हाथ खड़े कर चुका है।नींबूचौड़-भाबर मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक होने के कारण भाबर क्षेत्र की जनता वर्षों से पुराने हरिद्वार मार्ग (डिग्री कॉलेज-मवाकोट-कलालघाटी मार्ग) को वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने की मांग करती आ रही है। वर्ष 2017 में पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड कोटद्वार ने 8.5 किमी लंबे इस मोटर मार्ग का निर्माण कराया था। इसके बाद ध्रुवपुर में सुखरो नदी व सत्तीचौड़ स्थित ग्वालगढ़ गदेरे में दो डबल स्पान पुलों का निर्माण भी हुआ। पांच साल तक मार्ग का अनुरक्षण कार्य पीएमजीएसवाई ने किया। 2023 में सड़क निर्माण को पांच साल पूरा होने के बाद शासन के निर्देश पर इसे लोनिवि दुगड्डा को हस्तांतरित कर दिया गया।बरसात से खस्ताहाल हुए मार्ग पर पैच वर्क कराकर संबंधित विभाग ने अपना काम कर दिया। अब स्थिति यह है कि ध्रुवपुर स्थित सुखरो पुल और सत्तीचौड़ के बीच दो रपटों का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त है। भाबर निवासी कुबेर जलाल, राकेश ध्यानी, बृजमोहन रावत, जगदंबा प्रसाद उनियाल, राधेश्याम कुकरेती आदि का कहना है कि मालन पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद पुराना हरिद्वार मार्ग वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। लोनिवि को हस्तांतरित होने के बाद भी पुराना हरिद्वार मार्ग की हालत नहीं सुधरी है।I
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Iपुराना हरिद्वार मार्ग (डिग्री कॉलेज-मवाकोट-कलालघाटी) की हालत लोनिवि दुगड्डा को हस्तांतरित होने के एक साल बाद भी नहीं सुधरी है। मोटाढाक में मालन नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद से इसी मार्ग को भाबर के लोग वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। हालात यह है कि ध्रुवपुर और सत्तीचौड़ के बीच दो रपटे बरसात से क्षतिग्रस्त पड़े हैं और संबंधित विभाग पैच वर्क कर हाथ खड़े कर चुका है।नींबूचौड़-भाबर मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक होने के कारण भाबर क्षेत्र की जनता वर्षों से पुराने हरिद्वार मार्ग (डिग्री कॉलेज-मवाकोट-कलालघाटी मार्ग) को वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने की मांग करती आ रही है। वर्ष 2017 में पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड कोटद्वार ने 8.5 किमी लंबे इस मोटर मार्ग का निर्माण कराया था। इसके बाद ध्रुवपुर में सुखरो नदी व सत्तीचौड़ स्थित ग्वालगढ़ गदेरे में दो डबल स्पान पुलों का निर्माण भी हुआ। पांच साल तक मार्ग का अनुरक्षण कार्य पीएमजीएसवाई ने किया। 2023 में सड़क निर्माण को पांच साल पूरा होने के बाद शासन के निर्देश पर इसे लोनिवि दुगड्डा को हस्तांतरित कर दिया गया।बरसात से खस्ताहाल हुए मार्ग पर पैच वर्क कराकर संबंधित विभाग ने अपना काम कर दिया। अब स्थिति यह है कि ध्रुवपुर स्थित सुखरो पुल और सत्तीचौड़ के बीच दो रपटों का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त है। भाबर निवासी कुबेर जलाल, राकेश ध्यानी, बृजमोहन रावत, जगदंबा प्रसाद उनियाल, राधेश्याम कुकरेती आदि का कहना है कि मालन पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद पुराना हरिद्वार मार्ग वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। लोनिवि को हस्तांतरित होने के बाद भी पुराना हरिद्वार मार्ग की हालत नहीं सुधरी है।I