फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   People have been living for generations in Lansdowne Land

‘लैंसडौन में पीढ़ियों से रह रहे लोगों को मिले भूमि’

Thu, 17 Mar 2016 09:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कोटद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला कोटद्वार Updated Thu, 17 Mar 2016 09:42 PM IST
विज्ञापन

लैंसडौन से आवास की कमी के कारण हो रहे पलायन को रोकने के लिए छावनी परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. एसपी नैथानी ने रक्षा मंत्रालय से कई पीढ़ियों से रह रहे स्थानीय लोगों को भूमि देने की मांग की है।

विज्ञापन


बृहस्पतिवार को रक्षा मंत्रालय को भेजे गए पत्र में नैथानी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा भूमिहीनों को भूमि देकर उन्हें मकान निर्माण के लिए योजनाएं संचालित की जा रही है लेकिन लैंसडौन छावनी इसका अपवाद हैं। जहां ऐसी कोई योजना कार्यान्वित नहीं है। मकानों के न मिलने से लोग अन्यत्र बस रहे हैं जिससे नगर की आबादी पूर्व जनगणना में करीब छह हजार से घटकर वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार मात्र दो हजार रह गई है।
विज्ञापन


 नैथानी ने कहा कि नगर में कैंट द्वारा नगर की बसावट के दौरान सिविलियन के आवास के लिए 283 लोगों को लीज में जमीनें दी गई थी। लीज में बढ़ोतरी न होने के कारण पलायन की समस्या से नगर जूझ रहा है जिसका असर व्यापार, सामाजिक गतिविधियों में पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


128 सालों के बाद नगर में छावनी परिषद की सिविलियन लीज में कोई बढ़ोतरी नहीें हुई। उन्होंने रक्षा मंत्री को भेजे गए पत्र में कहा कि मौजूदा समय में लोगों की आवश्यकताएं बढ़ती जा रही हैं जिस कारण मकान मालिकों व किराएदारों के बीच मकान खाली करने को लेकर विवाद बढ़े हैं।


छावनी क्षेत्र में यदि सालों सालों से रह रहे लोगों को आवास के लिए भूमि आवंटित की जाती है तो इससे नगर का चौपट होता जा रहा व्यापार बढ़ेगा और नगर से आवास की कमी के कारण हो रहा पलायन थम सकेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed