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आठ अक्तूबर को संचालक मंडल को इस्तीफा सौंपकर पुन: चुनाव लड़ने का किया एलान

Fri, 04 Oct 2024 11:16 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2024 11:16 PM IST
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On October 8, he submitted his resignation to the Board of Directors and announced to contest the elections again.

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कोटद्वार। जीएमओयू के निवर्तमान अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल ने उन पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया। कहा कि वह आठ अक्तूबर को होने वाली संचालक मंडल की बैठक में कार्यकाल पूर्ण होने पर अपना इस्तीफा सौंपेंगे और पुन: डायरेक्टर का चुनाव भी लड़ेंगे।



सोमवार को अपने कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने यह बात कही। कहा कि संचालकों का चुनाव पहले भी लोकतांत्रिक तरीके से हुआ था। जिसमें 23 से 31 अगस्त तक चुनाव प्रक्रिया हुई। संचालक के लिए हेमेंद्र सिंह और जयप्रकाश सुंद्रियाल ने ही नामांकन कराया था, जिसके बाद उनका निर्विरोध निर्वाचन हुआ। इसके बाद कुछ लोगों ने जीएमओयू संघर्ष समिति का गठन कर आंदोलन शुरू कर दिया और 13 सितंबर को प्रस्तावित वार्षिक आम बैठक नहीं होने दिया।
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कहा कि प्रशासन की मौजूदगी में चुनाव को स्थगित कर दिया गया और संघर्ष समिति की सभी मांगें भी मान ली गईं। वित्तीय अनियमिताओं के आरोप पर उन्होंने कहा कि चार्टेर्ड एकाउंटेंट से वित्तीय लेखों की जांच कराई जाती है और कंपनी रजिस्ट्रार समेत सरकार को उसकी रिपोर्ट भेजी जाती है। उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां बताईं। कहा कि उन्होंने जीएमओयू मुख्यालय में सभागार और ग्लाजिंग का कार्य करवाया। संचालक मंडल के सदस्यों की सहमति के बाद कोटद्वार कोतवाली के सामने कंपनी की भूमि पर दुकानें बनवाईं। जिसमें कंपनी का एक भी पैसा नहीं लगा है और कंपनी को प्रतिमाह हजारों रुपये किराये के रूप में मिल रहे हैं। बदरीनाथ में स्थित कंपनी की भूमि पर भी गुड़गांव के ठेकेदार के सहयोग से चार मंजिला होटल बन रहा है, जिससे कंपनी को प्रतिमाह दो लाख रुपये किराया मिलेगा।
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कहा कि 1943 में ब्रिटिश शासनकाल में जीएमओयू का रजिस्ट्रेशन सेक्शन 25 (बी) में नो प्रोफिट नो लॉस कंपनी के रूप में हुआ था। वर्ष 2013 में सरकार ने कंपनी ने नियमों में बदलाव कर दिया और इसे 8 (बी) में शामिल कर दिया। इसके तहत कंपनी को लाभांश और भारी भरकम टैक्स देना होगा। इससे बचने के लिए जीएमओयू को एसोसिएट बनाने पर सहमति बनी।

यह उनका कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं है और यदि मोटर मालिकों को इस पर आपत्ति है तो वह कानूनी राय लेने के बाद इसे निरस्त करा सकते हैं। जीएम की नियुक्ति के सवाल पर उन्होंने कहा कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था जीएम देखता है और इसी को देखते हुए कंपनी में जीएम की नियुक्ति की गई थी। कहा कि पहले से ही सेवानिवृत्त अधिकारियों को जीएम बनाया जाता रहा है।
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