{"_id":"62387bbf513b647560727215","slug":"now-the-curriculum-is-being-taught-again-in-the-classrooms-kotdwar-news-drn4068862124","type":"story","status":"publish","title_hn":"कक्षाओं में अब दोबारा पढ़ाया जा रहा पाठ्यक्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कक्षाओं में अब दोबारा पढ़ाया जा रहा पाठ्यक्रम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के गुजर जाने के बाद क्षेत्र में अब बेसिक से लेकर 12वीं तक के सभी सरकारी और गैरसरकारी विद्यालय खुल चुके हैं। दो साल तक ऑनलाइन शिक्षा ले रहे बच्चों को अब ऑफलाइन कक्षाओं के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है, लेकिन कोरोनाकाल में ऑनलाइन शिक्षा के कारण बच्चों की शैक्षणिक स्तर पर बुरा असर पड़ा है, जिसकी भरपाई के लिए अब शिक्षकों को छात्र-छात्राओं के साथ अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। अभी कक्षाओं में दोबारा पाठ्यक्रम (रिविजन) पढ़ाया जा रहा है।
गत दो फरवरी को प्रदेश सरकार ने कोरोना के नए नियम के तहत सभी बेसिक से लेकर सीनियर सेकेंडरी विद्यालयों को ऑफलाइन शिक्षा के लिए खोल दिया है। शुरुआत के दिनों में छात्र-छात्राओं में कोरोना संक्रमण के भय के कारण छात्र संख्या करीब 50 प्रतिशत रही, लेकिन अब उपस्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन दो साल तक बच्चों की शिक्षा पर पड़े बुरे प्रभाव को लेकर शिक्षकों के साथ ही अभिभावक भी चिंतित हैं। राजकीय बालिका इंटर कालेज की प्रधानाचार्य सुनीता मधवाल ने बताया कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा ले रहे छात्र-छात्राएं अधिकतर मध्यम व गरीब परिवार से संबंधित हैं, जिनके पास ऑनलाइन शिक्षा के लिए स्मार्ट फोन नहीं हैं। ऐसे में छात्राएं कोरोना काल में शिक्षा से वंचित रहीं। विभाग ने बिना परीक्षा दिलाए उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया, लेकिन, बच्चों का शैक्षणिक स्तर बहुत कमजोर हो गया है, जिसके कारण शिक्षकों को अब छात्रों के साथ अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
- छात्रों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए निपुण भारत योजना और मिशन कोशिश के तहत तीन महीने में बच्चों को कोर्स का रिवीजन कराया जा रहा है। इसके अलावा शिक्षकों को भी अतिरिक्त मेहनत करनेे के निर्देश दिए गए हैं। - अभिषेक शुक्ला, उपखंड शिक्षा अधिकारी दुगड्डा।
विज्ञापन
विज्ञापन
गत दो फरवरी को प्रदेश सरकार ने कोरोना के नए नियम के तहत सभी बेसिक से लेकर सीनियर सेकेंडरी विद्यालयों को ऑफलाइन शिक्षा के लिए खोल दिया है। शुरुआत के दिनों में छात्र-छात्राओं में कोरोना संक्रमण के भय के कारण छात्र संख्या करीब 50 प्रतिशत रही, लेकिन अब उपस्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन दो साल तक बच्चों की शिक्षा पर पड़े बुरे प्रभाव को लेकर शिक्षकों के साथ ही अभिभावक भी चिंतित हैं। राजकीय बालिका इंटर कालेज की प्रधानाचार्य सुनीता मधवाल ने बताया कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा ले रहे छात्र-छात्राएं अधिकतर मध्यम व गरीब परिवार से संबंधित हैं, जिनके पास ऑनलाइन शिक्षा के लिए स्मार्ट फोन नहीं हैं। ऐसे में छात्राएं कोरोना काल में शिक्षा से वंचित रहीं। विभाग ने बिना परीक्षा दिलाए उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया, लेकिन, बच्चों का शैक्षणिक स्तर बहुत कमजोर हो गया है, जिसके कारण शिक्षकों को अब छात्रों के साथ अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
विज्ञापन
- छात्रों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए निपुण भारत योजना और मिशन कोशिश के तहत तीन महीने में बच्चों को कोर्स का रिवीजन कराया जा रहा है। इसके अलावा शिक्षकों को भी अतिरिक्त मेहनत करनेे के निर्देश दिए गए हैं। - अभिषेक शुक्ला, उपखंड शिक्षा अधिकारी दुगड्डा।
विज्ञापन