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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   No cases of human-wildlife conflict in the first mountain

पहाड़ में थम नहीं रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले

Wed, 06 Jul 2016 10:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंद्रमोहन शुक्ला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंद्रमोहन शुक्ला Updated Wed, 06 Jul 2016 10:57 PM IST
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पहाड़ में मानव-वन्य जीव संघर्ष के मामले थमने को नहीं हैं। बीरोंखाल के तकुलसारी में जंगली सूअर के हमले में दो महिलाओं की मौत से पूरे इलाके में मातम का माहौल है। यमकेश्वर ब्लाक के तल्ला ढांगू के कोटा गांव में 12 जून की रात को गुलदार घर की छत में मां की बगल में सोए हुए दस साल के बालक अभिषेक को उठाकर ले गया। घर से दो किमी दूर झाड़ियों में उसका अधखाया शव बरामद हुआ।

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पिछले वर्ष नवंबर माह में एक गुलदार ने यमकेश्वर ब्लाक में दो मासूमों को अपना निवाला बना लिया था, तब विभाग ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कर उसे मौत के घाट उतारा। आठ जून को दुगड्डा के मेरुवा गांव में गुलदार ने घर के आंगन में शौच के लिए निकली वृद्धा श्यामा देवी को अपना शिकार बना दिया।
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यमकेश्वर के साथ ही द्वारीखाल, दुगड्डा, नैनीडांडा, रिखणीखाल और जयहरीखाल विकासखंडों में गुलदार के साथ ही भालू का आतंक व्याप्त है। भालू के हमले में घायल होने वालों में सबसे ज्यादा ग्रामीण महिलाएं हैं। जो चारापत्ती और ईंधन की तलाश में क्षेत्र के जंगलों में जाने के लिए मजबूर रहती हैं। भालू के हमले के घायल होने के दो दर्जन से ज्यादा मामले प्रकाश में आए हैं।
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इसी साल चार फरवरी को कल्जीखाल के सरक्याणा गांव में घर के आंगन में खेलते हुए सात साल के बच्चे सुमित को गुलदार ने अपना निवाला बनाया तो यह सिलसिला थमा नहीं। इस साल सात बच्चों को गुलदार अपना निवाला बना चुका है।

ग्रामीणों का कहना है कि न जाने कब तक लोगों को वन्यजीव इसी तरह अपना निवाला बनाते रहेंगे। अपने घर के आंगन में खेल रहे मासूम, खेतों में काम कर रही महिलाएं भी अब सुरक्षित नहीं हैं।

गुलदार के हमले की घटनाएं
16 नवंबर, 2015-लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग  रेंज में अमोला के जंगल में वन गुर्जर के चार साल के बेटे को आंगन से  उठाकर गुलदार ने निवाला बना डाला।
23 नवंबर, 2015-लालढांग रेंज के  यमकेश्वर क्षेत्र में धारकोट गढ़ाकोट गांव में आठ साल की मासूम संतोषी को  निवाला बना डाला। वन विभाग ने इसे नरभक्षी घोषित कर मौत के घाट उतार दिया।
28 फरवरी, 2016-जयहरीखाल के ओडल गांव में गुलदार ने पांच साल की बच्ची केे बनाया निवाला।
04 मार्च, 2016- लैंसडौन के पास जलेथा गांव में साढ़े चार साल की बच्ची आरुषि को निवाला बनाया।
08 जून-2016 को दुगड्डा ब्लाक के मेरूवा गांव में तड़के शौच के लिए निकली वृद्धा श्यामा देवी को घर के आंगन में निवाला बनाया।
12 जून-2016- यमकेश्वर के तल्ला ढांगू के कोटा गांव में घर की छत से दस साल के बालक अभिषेक को गुलदार ने निवाला बनाया।
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.क्षेत्र में हुए हाथी के हमले की घटनाएं
1. 22 मार्च, 2012 लालढांग रेंज में जयदेवपुर सिगड्डी निवासी एक महिला को हाथी ने पटककर मार डाला।
2. 30 मई, 2013- कोटद्वार रेंज की ग्वालगढ़ बीट में जगदेव मंदिर के पास जंगल में घास-पत्ती लेेने गए एक व्यक्ति को हाथी ने कुचल डाला, मौत।
3. 05 दिसंबर, 2014 को कोटद्वार रेंज में सत्तीचौड़ निवासी महिला विजयलक्ष्मी (50) पत्नी शंभूप्रसाद भट्ट को मालन ब्लाक के जंगल में हाथी ने हमला कर घायल किया।

4. 10 दिसंबर, 2014 आमपड़ाव स्थित बाल्मीकी नगर निवासी वृद्धा लीला देवी (70) पत्नी स्व. जगदीश को डिग्री कालेज के पीछे के जंगल में हाथी ने कुचल डाला, मौत।
5. 20 दिसंबर, 2014 को सत्तीचौड़ के जंगल में घासपत्ती लेने गई महिला बीना देवी पत्नी उत्तम सिंह निवासी पदमपुर को हाथी ने दौड़ाकर घायल किया।
6. 11 जनवरी, 2015-सुखरौ के जंगल में घासपत्ती लेने गई शिवपुर निवासी एक महिला को हाथी ने दौड़ाया, घायल।
7. 20 जनवरी, 2015-कोटड़ी रेंज में कार्यरत वन दारोगा भारत सिंह रावत को गश्त के दौरान हथिनी ने पटककर मार डाला।
8. 19 सितंबर, 2015- कुंभीचौड़ निवासी महिला सुनीता अधिकारी (33) पत्नी कैलाश अधिकारी को सनेह के जंगल में हाथी ने मार डाला।
9. 11 नवंबर, 2015- कालागढ़ टाइगर रिजर्व के सोनानदी रेंज में लकड़ी लेने गए अनीश (50) निवासी बढ़ापुर को मौत के घाट उतारा।

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