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कोटद्वार के ट्रंचिंग ग्राउंड पर एनजीटी ने राज्य सरकार से तलब की रिपोर्ट
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कोटद्वार। कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में खोह नदी के तट पर स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड में विकराल होती कूड़ा निस्तारण की समस्या पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी ने राज्य सरकार समेत सभी पक्षों से अपनी रिपोर्ट के साथ 22 नवंबर को उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
याची के अधिवक्ता रोहित डंडरियाल, अंकिता बलूनी व अमृतांशु ने बताया कि खोह नदी के तट पर स्थित नगर निगम के ट्रंचिंग ग्राउंड के मुद्दे पर मंगलवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार को इस मामले में अभी तक उठाए गए कदम, कार्रवाई रिकार्ड के साथ 22 नवंबर तक उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि वाल ऑफ काइंडनेस संस्था के अध्यक्ष मनोज नेगी ने इस संबंध में एनजीटी में याचिका दायर की है। इसमें नगर निगम प्रशासन की ओर से खोह नदी के तट पर स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप किए जा रहे कूड़े को नियम विरुद्ध बताया गया है। कहा कि कूड़े के ढेर लगने से समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। नगर निगम प्रशासन द्वारा इस समस्या को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। हालत यह हो गई कि कूड़ा मुक्तिधाम के गेट तक फैल चुका है और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि मंगलवार को इस याचिका की एनजीटी के न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, एसपी वांगडी, के. रामकृष्णन और नागिन नंदा की चार न्यायाधीश वाली पीठ में सुनवाई हुई। एनजीटी ने पर्यावरण की रक्षा के मामले को गंभीरता से समझा। राज्य सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय में नियुक्त स्टैंडिंग कौंसिल जेके रावत ने एनजीटी में उपस्थित होकर याचिका की प्रति प्राप्त की।
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याची के अधिवक्ता रोहित डंडरियाल, अंकिता बलूनी व अमृतांशु ने बताया कि खोह नदी के तट पर स्थित नगर निगम के ट्रंचिंग ग्राउंड के मुद्दे पर मंगलवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार को इस मामले में अभी तक उठाए गए कदम, कार्रवाई रिकार्ड के साथ 22 नवंबर तक उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि वाल ऑफ काइंडनेस संस्था के अध्यक्ष मनोज नेगी ने इस संबंध में एनजीटी में याचिका दायर की है। इसमें नगर निगम प्रशासन की ओर से खोह नदी के तट पर स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप किए जा रहे कूड़े को नियम विरुद्ध बताया गया है। कहा कि कूड़े के ढेर लगने से समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। नगर निगम प्रशासन द्वारा इस समस्या को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। हालत यह हो गई कि कूड़ा मुक्तिधाम के गेट तक फैल चुका है और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
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उन्होंने बताया कि मंगलवार को इस याचिका की एनजीटी के न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, एसपी वांगडी, के. रामकृष्णन और नागिन नंदा की चार न्यायाधीश वाली पीठ में सुनवाई हुई। एनजीटी ने पर्यावरण की रक्षा के मामले को गंभीरता से समझा। राज्य सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय में नियुक्त स्टैंडिंग कौंसिल जेके रावत ने एनजीटी में उपस्थित होकर याचिका की प्रति प्राप्त की।
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