{"_id":"66fa86452c143c8b85082095","slug":"narad-moh-and-ravana-tapa-leela-staged-in-ramlila-kotdwar-news-c-49-1-kdr1001-110884-2024-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kotdwar News: फोटो\nरामलीला में हुआ नारद मोह और रावण तप लीला का मंचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kotdwar News: फोटो रामलीला में हुआ नारद मोह और रावण तप लीला का मंचन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कण्वघाटी। श्री ओंकारेश्वर रामलीला एवं दशहरा मेला समिति कण्वघाटी (कलालघाटी) की ओर से आयोजित रामलीला मंचन के दूसरे दिन नारद मोह और रावण तप लीला का आयोजन किया गया।
रामलीला मंचन की शुरूआत समिति के अध्यक्ष मदन मोहन सिंह रावत, अनिल बलूनी और राकेश बिष्ट ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की। मंचन में नारद मुनि भगवान विष्णु के पास जाकर विश्वमोहिनी के स्वयंवर के लिए श्री हरि के मुख की कामना करते हैं।
भगवान विष्णु नारद मुनि के अंदर मोह की भावना देखते हैं और उन्हें एक वानर का मुख प्रदान कर देते हैं। विश्वमोहिनी के स्वयंवर में उनका बहुत उपहास होता है। वे क्रोध में भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं। इसके उपरांत रावण जन्म की लीला का मंचन होता है।
विज्ञापन
रावण जन्म होते ही आकाश में मेघ गर्जना होती है। इसके बाद रावण, कुंभकर्ण, विभीषण की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उन्हें मनचाहा वरदान देते हैं। रावण द्वारा सभी देवताओं को बंदी बनाना, मुनि नारद द्वारा रावण को कैलाश पर्वत उठाने के लिए कहना, रावण का पर्वत उठाने में असफल रहना, रावण का भगवान शिव की तपस्या करना और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को खड़ग प्रदान करने की लीला का मंचन किया गया। इस अवसर पर राजेंद्र प्रसाद पंत, सौरभ रावत, विनोद पोखरियाल, पितृ शरण जोशी, प्रणय डबराल, मनोज नेगी, आशीष कुकरेती मौजूद रहे।
विज्ञापन
कण्वघाटी। श्री ओंकारेश्वर रामलीला एवं दशहरा मेला समिति कण्वघाटी (कलालघाटी) की ओर से आयोजित रामलीला मंचन के दूसरे दिन नारद मोह और रावण तप लीला का आयोजन किया गया।
रामलीला मंचन की शुरूआत समिति के अध्यक्ष मदन मोहन सिंह रावत, अनिल बलूनी और राकेश बिष्ट ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की। मंचन में नारद मुनि भगवान विष्णु के पास जाकर विश्वमोहिनी के स्वयंवर के लिए श्री हरि के मुख की कामना करते हैं।
विज्ञापन
भगवान विष्णु नारद मुनि के अंदर मोह की भावना देखते हैं और उन्हें एक वानर का मुख प्रदान कर देते हैं। विश्वमोहिनी के स्वयंवर में उनका बहुत उपहास होता है। वे क्रोध में भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं। इसके उपरांत रावण जन्म की लीला का मंचन होता है।
विज्ञापन
रावण जन्म होते ही आकाश में मेघ गर्जना होती है। इसके बाद रावण, कुंभकर्ण, विभीषण की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उन्हें मनचाहा वरदान देते हैं। रावण द्वारा सभी देवताओं को बंदी बनाना, मुनि नारद द्वारा रावण को कैलाश पर्वत उठाने के लिए कहना, रावण का पर्वत उठाने में असफल रहना, रावण का भगवान शिव की तपस्या करना और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को खड़ग प्रदान करने की लीला का मंचन किया गया। इस अवसर पर राजेंद्र प्रसाद पंत, सौरभ रावत, विनोद पोखरियाल, पितृ शरण जोशी, प्रणय डबराल, मनोज नेगी, आशीष कुकरेती मौजूद रहे।