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जलसंस्थान ने विलंब शुल्क के साथ थमाए दो साल के बिल
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जल संस्थान की लापरवाही पूर्ण कार्यप्रणाली यमकेश्वर ब्लाक की ग्राम पंचायत दिबोगी के ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि विभाग ने ग्रामीणों को विलंब शुल्क के साथ दो साल के बिल दिए हैं, जिससे दो साल का पड़ने वाला 450 रुपये का बिल विलंब शुल्क के साथ 700 रुपये का हो गया है। जिसके कारण ग्रामीणों में विभाग के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
यमकेश्वर ब्लाक की ग्राम पंचायत दिबोगी में क्षेत्र के एक स्रोत से संस्थान वर्ष 1989 से पानी की आपूर्ति कर रहा है। वर्ष 2019 तक ग्रामीणों से प्रत्येक परिवार प्रतिमाह 15 रुपये की दर से वार्षिक शुल्क 180 रुपये नकद लिया जाता था, लेकिन वर्ष 2020 से कोटद्वार जल संस्थान द्वारा ऑनलाइन बिल की व्यवस्था कर दी गई। वर्तमान में विभाग की ओर से प्रत्येक चार माह में बिल भेजने का प्रावधान किया है। लेकिन, विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली का आलम यह है कि विभाग दो साल में एक ही बिल भेज रहा है और उसमें भी हर चार माह के हिसाब से बिलंब शुल्क लिया जा रहा है। जिससे उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दरों के हिसाब से जहां चार माह में मात्र 75 रुपये तक का भुगतान करना था, वहीं दो साल के बिल को एक साथ विलंब शुल्क लगाकर लगभग 600 से 700 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीण विक्रम सिंह रावत, संजीव कंडवाल, नंद किशोर कंडवाल, राजेश रावत ने विभाग पर मनमानी करने का आरोप लगाया। कहा कि पूर्व में वे समय पर पानी के बिलों का भुगतान कर रहे थे। लेकिन, विभाग की लापरवाही पूर्ण कार्यप्रणाल का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
यमकेश्वर के दिबोगी गांव में दो साल के बिल विलंब शुल्क के साथ दिए जाने की जानकारी नहीं है। ग्रामीणों की ओर से बिल प्रस्तुत करने पर बिल में संशोधन किया जाएगा।
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- संतोष कुमार उपाध्याय, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान कोटद्वार
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यमकेश्वर ब्लाक की ग्राम पंचायत दिबोगी में क्षेत्र के एक स्रोत से संस्थान वर्ष 1989 से पानी की आपूर्ति कर रहा है। वर्ष 2019 तक ग्रामीणों से प्रत्येक परिवार प्रतिमाह 15 रुपये की दर से वार्षिक शुल्क 180 रुपये नकद लिया जाता था, लेकिन वर्ष 2020 से कोटद्वार जल संस्थान द्वारा ऑनलाइन बिल की व्यवस्था कर दी गई। वर्तमान में विभाग की ओर से प्रत्येक चार माह में बिल भेजने का प्रावधान किया है। लेकिन, विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली का आलम यह है कि विभाग दो साल में एक ही बिल भेज रहा है और उसमें भी हर चार माह के हिसाब से बिलंब शुल्क लिया जा रहा है। जिससे उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दरों के हिसाब से जहां चार माह में मात्र 75 रुपये तक का भुगतान करना था, वहीं दो साल के बिल को एक साथ विलंब शुल्क लगाकर लगभग 600 से 700 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीण विक्रम सिंह रावत, संजीव कंडवाल, नंद किशोर कंडवाल, राजेश रावत ने विभाग पर मनमानी करने का आरोप लगाया। कहा कि पूर्व में वे समय पर पानी के बिलों का भुगतान कर रहे थे। लेकिन, विभाग की लापरवाही पूर्ण कार्यप्रणाल का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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यमकेश्वर के दिबोगी गांव में दो साल के बिल विलंब शुल्क के साथ दिए जाने की जानकारी नहीं है। ग्रामीणों की ओर से बिल प्रस्तुत करने पर बिल में संशोधन किया जाएगा।
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- संतोष कुमार उपाध्याय, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान कोटद्वार