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रिटायर्ड प्रेम सिंह पाबौ में दुग्ध उद्यम को दे रहे बढ़ावा
पाबौ
Updated Tue, 12 Jan 2016 09:09 PM IST
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वायु सेना से रिटायर होने के बाद पाबौ ब्लॉक के चोपड़ा गांव के प्रेम सिंह भंडारी पहाड़ क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन को एक उद्यम के रूप में स्थापित करने में जुटे हुए हैं। वह अपनी गायों से रोज पौने तीन सौ लीटर दूध रोज पाबौ के अलावा पौड़ी, पैठाणी और किर्खू में सप्लाई कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पर्वतीय क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं। इसके बावजूद यहां लोगों की दूध के लिए मैदानी क्षेत्रों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की आपूर्ति उत्तर प्रदेश के दुग्ध उत्पादन समितियों को कर रहे हैं। ऐसे में चोपड़ा गांव निवासी प्रेम सिंह भंडारी पशुपालकों और उद्यमियों लोगों के लिए नयी प्रेरणा दे रहे हैं।
भंडारी बताते हैं कि जुलाई 2007 में इंडियन एयर फोर्स से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पाबौ से करीब एक किलोमीटर दूर अपने गांव चोपड़ा में आकर दुग्ध उत्पादन को ही अपनी आय का जरिया बनाने का लक्ष्य बनाया। इसके लिए 2012 से गांव में डेरी खोलने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिया। पहले चोपड़ा गांव के लोगों से गांव से नीचे जमीन खरीदी। बाद में जमीन का सुधारीकरण, गायों को रखने के लिए गोशाला फिर डेरी खोलने के लिए भवन बनाया। सितंबर 2014 में लुधियाना हाल्स्टी फिजियन नस्ल की छह गायें लाकर दुग्ध उत्पादन शुरू कर दिया। वर्तमान में उनके पास 26 गायें हैं। सभी विदेशी नस्ल की हैं जिनसे रोज करीब 275 लीटर दूध उत्पादित हो रहा है। डेरी में उत्पादित दूध की पैकिंग कर पाबौ, नौठा, पौड़ी, किर्खू बाजार आदि क्षेत्रों में बिक्री कर रहे हैं। इस कार्य में उनका बेटा आशीष भंडारी भी उनका हाथ बंटा रहा है। वह अपनी डेरी पांच अन्य लोगों को भी रोजगार मुहैया करा रहे हैं।
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कोट
पहाड़ में भले ही संसाधन कम हैं लेकिन स्वरोजगार की काफी संभावनाएं हैं। स्वरोजगार स्थापित करने के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की जरूरत है। शुद्ध दूध होने के कारण पाबौ, पौड़ी समेत विभिन्न जगहों पर आज दूध की मांग बढ़ती जा रही है। दुग्ध उत्पादन व्यवसाय में तत्काल मुनाफा नहीं मिलता है।
- प्रेम सिंह भंडारी
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उल्लेखनीय है कि पर्वतीय क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं। इसके बावजूद यहां लोगों की दूध के लिए मैदानी क्षेत्रों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की आपूर्ति उत्तर प्रदेश के दुग्ध उत्पादन समितियों को कर रहे हैं। ऐसे में चोपड़ा गांव निवासी प्रेम सिंह भंडारी पशुपालकों और उद्यमियों लोगों के लिए नयी प्रेरणा दे रहे हैं।
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भंडारी बताते हैं कि जुलाई 2007 में इंडियन एयर फोर्स से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पाबौ से करीब एक किलोमीटर दूर अपने गांव चोपड़ा में आकर दुग्ध उत्पादन को ही अपनी आय का जरिया बनाने का लक्ष्य बनाया। इसके लिए 2012 से गांव में डेरी खोलने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिया। पहले चोपड़ा गांव के लोगों से गांव से नीचे जमीन खरीदी। बाद में जमीन का सुधारीकरण, गायों को रखने के लिए गोशाला फिर डेरी खोलने के लिए भवन बनाया। सितंबर 2014 में लुधियाना हाल्स्टी फिजियन नस्ल की छह गायें लाकर दुग्ध उत्पादन शुरू कर दिया। वर्तमान में उनके पास 26 गायें हैं। सभी विदेशी नस्ल की हैं जिनसे रोज करीब 275 लीटर दूध उत्पादित हो रहा है। डेरी में उत्पादित दूध की पैकिंग कर पाबौ, नौठा, पौड़ी, किर्खू बाजार आदि क्षेत्रों में बिक्री कर रहे हैं। इस कार्य में उनका बेटा आशीष भंडारी भी उनका हाथ बंटा रहा है। वह अपनी डेरी पांच अन्य लोगों को भी रोजगार मुहैया करा रहे हैं।
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पहाड़ में भले ही संसाधन कम हैं लेकिन स्वरोजगार की काफी संभावनाएं हैं। स्वरोजगार स्थापित करने के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की जरूरत है। शुद्ध दूध होने के कारण पाबौ, पौड़ी समेत विभिन्न जगहों पर आज दूध की मांग बढ़ती जा रही है। दुग्ध उत्पादन व्यवसाय में तत्काल मुनाफा नहीं मिलता है।
- प्रेम सिंह भंडारी