मोटर नगर बस अड्डे के लिए एक साल और इंतजार
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देवीरोड स्थित मोटर नगर में पीपीपी मोड पर तीन साल से निर्माणाधीन अत्याधुनिक बस अड्डा और मॉल के निर्माण में अभी एक साल से ज्यादा वक्त लग सकता है। अभी तक धरातल पर पंद्रह से बीस फीसदी निर्माण कार्य ही हो सका है। सुस्त निर्माण कार्य के पीछे कार्यदायी एजेंसी ने नगरपालिका द्वारा उन्हें पर्याप्त भूमि उपलब्ध न करना बताया जा रहा है। इसी सिलसिले में शनिवार को बस अड्डा निर्माण के लिए बनी मानीटरिंग कमेटी के सदस्यों ने बस अड्डा निर्माण की धरातलीय स्थिति का निरीक्षण किया। तय हुआ कि नगर पालिका जल्द ही किराए पर दी गई कैंटीन को खाली करवाकर जमीन उपलब्ध कराएगा।
नगर पालिका ने मोटर नगर स्थित अपनी जमीन पर बस अड्डा और मॉल निर्माण के लिए दिल्ली की एक कंपनी से अनुबंध किया है। पीपीपी मोड में बनने वाले इस बस अड्डा और मॉल में करीब 26 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। तीन साल पूर्व हुए इस अनुबंध के मुताबिक अब तक बस अड्डे का निर्माण पूरा हो जाना था, लेकिन नगर पालिका की ओर से जमीन खाली कराने और भू-उपयोग बदलने में हुई लेट-लतीफी निर्माण को पीछे धकेलने में लगी है। शहर में समुचित पार्किंग और बस अड्डा न होने के कारण सभी परिवहन कंपनियों और जनता बेसब्री से बस अड्डे का काम पूरा होने का इंतजार कर रही है।
शनिवार को अधिशासी अधिकारी अमरजीत कौर, एआरटीओ सुरेंद्र कुमार, मॉनीटरिंग कमेटी के सदस्य संजय मित्तल, राकेश मित्तल, कार्यदायी एजेंसी के इंजीनियर और अधिकारियों ने निर्माणाधीन बस अड्डे का मुआयना कर कैंटीन वाली जगह खाली कराकर देने को कहा। ईओ ने कहा कि मानीटरिंग कमेटी की रिपोर्ट जल्द बोर्ड बैठक में रखी जाएगी। कैंटीन खाली कराने को नोटिस दिए जाएंगे। बस अड्डे के निर्माण में हो रही लेटलतीफी पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बस अड्डा निर्माण के लिए बनाई गई कसल्टेंट कंपनी के इंजीनियर रमेश जोशी ने कहा कि जमीन उपलब्ध होते ही एक साल के अंदर निर्माण कार्य पूरा कराने पर जोर रहेगा। इस मौके पर पालिका सभासद महेश भाटिया समेत कई लोग मौजूद थे।
पूर्व का अनुबंध खत्म हुए बिना दूसरा अनुबंध कर दिया
बिना भू-उपयोग बदले और दुकानदारों के साथ पूर्व के अनुबंध खत्म किए बिना ही नगर पालिका ने मोटर नगर में बस अड्डा बनाने के लिए निर्माणाधीन संस्था के साथ अनुबंध कर दिया। जमीन का भू उपयोग बदलने और दूसरे अनुबंध को खत्म करने में तीन साल गुजर गए। अब पालिका और निर्माणाधीन कंपनी के बीच शासन स्तर से नियुक्त सलाहकार संस्था ने पालिका को निर्माण के लिए और समय बढ़ाने की सलाह दी है जिस काम को दो साल में पूरा होना था, उसमें यदि अब भी कोई पेच नहीं फंसा तो अब चार साल में पूरा होगा। वर्ष 2013 में हुए अनुबंध के अनुसार दिल्ली की कंपनी को 23 मार्च 2015 तक बस अड्डा बनाकर देना था। कंपनी को बस अड्डे के प्रथम तल पर व्यावसायिक कांप्लेक्स का भी निर्माण करना है लेकिन नगर पालिका ने भू-उपयोग परिवर्तन में ही एक साल लगा दिये। इससे पूर्व इस जमीन पर कैंटीन, शौचालय और वर्कशॉप संचालित होती रही। कुछ जमीन एक साल पहले ही कार्यदायी एजेंसी को मिली। कैंटीन की जमीन अब तक खाली नहीं कराई जा सकी है।