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गढ़वाल विवि ने की गायन शैलियों के संरक्षण की पहल
ब्यूरो/अमर उजाला श्रीनगर
Updated Wed, 04 May 2016 10:29 PM IST
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उत्तराखंड की लोक परंपराओं व गायन शैलियों को बचाने के लिए गढ़वाल विवि ने पहल की है। विवि के लोककला संस्कृति एवं निष्पादन केंद्र ने पांडव व मुखौटा शैली पर पारंपरिक ऑडियो कैसेट तैयार किया है।
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लोककला संस्कृति एवं निष्पादन केंद्र के प्रवक्ता डा. संजय पांडे की ओर से निर्मित इस कैसेट में आठ ऑडियो गीत हैं। डा. पांडे ने बताया पारंपरिक गीतों को नई पीढ़ी तक पहुचंानेे के लिए संगीतबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कुछ गढ़वाली गानों में फूहड़ता परोसी जा रही है।
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इससे उत्तराखंड का पारंपरिक संगीत पहचान खो रहा है। जबकि देश के अन्य राज्यों में पारंपरिक संगीत मजबूत हो रहा है। डा. पांडे ने बताया कि अपनी संस्कृति व पारंपरिक संगीत को बचाने के लिए यह प्रयास किया गया है। कैसेट में सभी पौराणिक महत्व के पारंपरिक गीत हैं।
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पांडव व मुखौटा शैली गढ़वाल क्षेत्र में काफी विख्यात हैं। ग्रामीण अंचलों में आज भी पांडव नृत्य का प्रचलन है, लेकिन नई पीढ़ी को इसकी जानकारी नहीं होने से यह ग्रामीण अंचलों से भी विलुप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग की स्थापना का उद्देश्य भी उत्तराखंड की परंपराओं को संरक्षित कर नई पीढी तक पहुंचाना है। कहा कि उत्तराखंड की सभी पारंपरिक शैलियों का अध्ययन कर उन्हें संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।