{"_id":"7bb39c1560a04f53c14e833611e2e470","slug":"exotic-birds-not-comes-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब नहीं होता विदेशी पक्षियों का कलरव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब नहीं होता विदेशी पक्षियों का कलरव
श्रीनगर
Updated Thu, 24 Dec 2015 06:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक वक्ता था जब साइबेरिया जैसे ठंडे देशों से शीतकाल में बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी यहां प्रवास करने आते थे। आज यहां नदी किनारे निर्माण कार्य, अंधाधुंध खनन और बढ़ती मानवीय गतिविधियों के कारण विदेशी पक्षियों ने अपना मुंह मोड़ लिया है। उन्होंने यहां आना ही बंद कर दिया है।
विदेशी पक्षी यहां दिसंबर प्रथम सप्ताह से मध्य फरवरी तक निवास करते थेे। श्रीनगर शहर व आसपास के क्षेत्रों में अलकनंदा नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर खनन पट्टे स्वीकृत हैं। नदी किनारे मशीनों के संचालन, निर्माण कार्यों, खनन व मनुष्यों की बढ़ती गतिविधियों के कारण शीतकाल में विदेशों से आने वाले मेहमान पक्षियों का रास्ता बंद हो गया है।
गढ़वाल विवि के वनस्पति विज्ञान विभाग में तैनात डा. बीएस भंडारी ने बताया कि दिसंबर के शुरुआत में साइबेरिया जैसे ठंडे देशों से सुरखाब नाम के पक्षी बड़ी संख्या में अलकनंदा नदी किनारे पहुंचते थे। जो यहां मध्य फरवरी तक रहते थे लेकिन इस बार अभी तक मात्र दो ही पक्षी दिखाई दिये। जबकि पिछले वर्ष भी मात्र 9 पक्षी इस क्षेत्र में दिखाई दिए।
विज्ञापन
डा. भंडारी बताते हैं कि पक्षियों के यहां नहीं पहुंचने का कारण खनन व नदी किनारे मानवीय गतिविधियां बढ़ना है। इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों से आने वाले मेहमान पक्षियों ने भी श्रीनगर से अपना मुंह मोड़ दिया है।
विज्ञापन
विदेशी पक्षी यहां दिसंबर प्रथम सप्ताह से मध्य फरवरी तक निवास करते थेे। श्रीनगर शहर व आसपास के क्षेत्रों में अलकनंदा नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर खनन पट्टे स्वीकृत हैं। नदी किनारे मशीनों के संचालन, निर्माण कार्यों, खनन व मनुष्यों की बढ़ती गतिविधियों के कारण शीतकाल में विदेशों से आने वाले मेहमान पक्षियों का रास्ता बंद हो गया है।
विज्ञापन
गढ़वाल विवि के वनस्पति विज्ञान विभाग में तैनात डा. बीएस भंडारी ने बताया कि दिसंबर के शुरुआत में साइबेरिया जैसे ठंडे देशों से सुरखाब नाम के पक्षी बड़ी संख्या में अलकनंदा नदी किनारे पहुंचते थे। जो यहां मध्य फरवरी तक रहते थे लेकिन इस बार अभी तक मात्र दो ही पक्षी दिखाई दिये। जबकि पिछले वर्ष भी मात्र 9 पक्षी इस क्षेत्र में दिखाई दिए।
विज्ञापन
डा. भंडारी बताते हैं कि पक्षियों के यहां नहीं पहुंचने का कारण खनन व नदी किनारे मानवीय गतिविधियां बढ़ना है। इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों से आने वाले मेहमान पक्षियों ने भी श्रीनगर से अपना मुंह मोड़ दिया है।