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कैलाड गांव में पेयजल किल्लत, निगम नहीं ले रहा सुध
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बीरोंखाल के अंतर्गत ग्राम कैलाड के ग्रामीण एक साल से पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। वर्ष 2019 में असामाजिक तत्वों ने पेयजल योजना का सोलर पैनल क्षतिग्रस्त कर दिया था, तभी से गांव में पेयजल की समस्या बनी है। ग्रामीणों ने सोलर पैनल की मरम्मत कराकर पेयजल योजना शुरू करने और उसकी सुरक्षा की मांग की।
बीरोंखाल ब्लॉक के कैलाड गांव के 60 परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शासन ने वर्ष 2018 में 77.80 लाख की लागत से घटगाड पेयजल योजना को मंजूरी दी। जल निगम पौड़ी को कार्यदायी संस्था बनाया गया। सौर ऊर्जा आधारित पेयजल योजना वर्ष 2019 में दो फेस में पूरी हुई। पेयजल योजना बनने से ग्रामीणों को सुचारु रूप से पानी मिलने लगा, लेकिन पेयजल योजना की सुरक्षा के लिए विभाग की ओर से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए और निर्माण के तीन माह बाद ही असामाजिक तत्वों ने पेयजल योजना के सौर पैनल क्षतिग्रस्त कर दिए। एक साल बाद भी विभागीय लापरवाही के चलते सोलर पैनल को ठीक नहीं किया गया, जिससे पेयजल योजना ठप पड़ी है और ग्रामीणों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान ऊषा बहुखंडी ने आरोप लगाते हुए कहा की योजना पूरी होने के बाद आज तक ग्राम सभा को हस्तांतरित नहीं हुई है। साथ ही स्टीमेट में स्वीकृत सौर ऊर्जा के पैनलों की सुरक्षा के लिए स्वीकृत फेंसिंग तारबाड़ भी नहीं बनाई गई है। कहा कि गांव में एक प्राकृतिक स्रोत है। इससे पूरे गांव की प्यास बुझाना संभव नहीं है। पेयजल निगम यांत्रिकी शाखा कोटद्वार के अधिशासी अभियंता विकास गौतम का कहना है कि सोलर पैनलों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग तारबाड़ लगनी थी, लेकिन ठेकेदार को 15 लाख रुपये का भुगतान नहीं होने पर उसने कार्य रोक दिया। जल्द ही पैनल को ठीक कराने के साथ ही सुरक्षा तारबाड़ का निर्माण करा दिया जाएगा।
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बीरोंखाल ब्लॉक के कैलाड गांव के 60 परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शासन ने वर्ष 2018 में 77.80 लाख की लागत से घटगाड पेयजल योजना को मंजूरी दी। जल निगम पौड़ी को कार्यदायी संस्था बनाया गया। सौर ऊर्जा आधारित पेयजल योजना वर्ष 2019 में दो फेस में पूरी हुई। पेयजल योजना बनने से ग्रामीणों को सुचारु रूप से पानी मिलने लगा, लेकिन पेयजल योजना की सुरक्षा के लिए विभाग की ओर से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए और निर्माण के तीन माह बाद ही असामाजिक तत्वों ने पेयजल योजना के सौर पैनल क्षतिग्रस्त कर दिए। एक साल बाद भी विभागीय लापरवाही के चलते सोलर पैनल को ठीक नहीं किया गया, जिससे पेयजल योजना ठप पड़ी है और ग्रामीणों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान ऊषा बहुखंडी ने आरोप लगाते हुए कहा की योजना पूरी होने के बाद आज तक ग्राम सभा को हस्तांतरित नहीं हुई है। साथ ही स्टीमेट में स्वीकृत सौर ऊर्जा के पैनलों की सुरक्षा के लिए स्वीकृत फेंसिंग तारबाड़ भी नहीं बनाई गई है। कहा कि गांव में एक प्राकृतिक स्रोत है। इससे पूरे गांव की प्यास बुझाना संभव नहीं है। पेयजल निगम यांत्रिकी शाखा कोटद्वार के अधिशासी अभियंता विकास गौतम का कहना है कि सोलर पैनलों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग तारबाड़ लगनी थी, लेकिन ठेकेदार को 15 लाख रुपये का भुगतान नहीं होने पर उसने कार्य रोक दिया। जल्द ही पैनल को ठीक कराने के साथ ही सुरक्षा तारबाड़ का निर्माण करा दिया जाएगा।
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