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Kotdwar News: भितरघात के कारण कांग्रेस नहीं संभाल पाई विरासत, भाजपा को मिली संजीवनी

Mon, 27 Jan 2025 10:43 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jan 2025 10:43 PM IST
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Congress could not maintain its legacy due to conflict, BJP got lifeline

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कोटद्वार। पार्टी के भीतर भितरघात के कारण इस चुनाव में मेयर पद पर कांग्रेस प्रत्याशी रंजना रावत कांग्रेस की विरासत को नहीं संभाल सकीं। कोटद्वार नगर निगम के पहले चुनाव में कांग्रेस सिंबल पर चुनाव लड़ीं पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी की पत्नी कांग्रेस प्रत्याशी रही हेमलता नेगी को मिले वोटों से 1,406 वोट पीछे रह गईं, जबकि भाजपा प्रत्याशी ने शैलेंद्र सिंह रावत ने रिकॉर्ड 26,787 वोट अधिक प्राप्त किए।

2018 में नगर निगम के पहले चुनाव में 1,07,350 में से 69,339 मतदाताओं ने मतदान किया था। तब मेयर पद पर नौ प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। सर्वाधिक 25,347 वोट लेकर कांग्रेस प्रत्याशी हेमलता नेगी पहली मेयर निर्वाचित हुई थीं। तब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष स्व. धीरेंद्र चौहान की पत्नी विभा चौहान 23,779 वोटों के साथ उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहीं थीं। तब 11,386 वोट के साथ भाजपा प्रत्याशी नीतू रावत तीसरे स्थान पर रहीं थीं। भाजपा को भी तब जबरदस्त भितरघात से जूझना पड़ा था।
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इन छह वर्षों में ही तस्वीर बिल्कुल बदल गई। इस बार 23 जनवरी को 1,18,808 में से 75,675 मतदाताओं ने मतदान किया था। 25 जनवरी को आए चुनाव परिणामों में पिछले चुनाव की अपेक्षा भाजपा प्रत्याशी तीसरे स्थान से टॉप पर पहुंच गए। कांग्रेस प्रत्याशी पहले स्थान से दूसरे और निर्दलीय प्रत्याशी दूसरे स्थान से तीसरे स्थान पर खिसक गए। हालांकि इस बार के नगर निगम चुनाव में कई समीकरण बदले हुए थे।
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एक-दूसरे के वार्डों में सेंधमारी, भाजपा का पलड़ा भारी



भाजपा और कांग्रेस एकदूसरे के चिरप्रतिद्वंद्वी रहे हैं। एकदूसरे के खेमे से वोट उठाकर लाने की क्षमता भी रखते हैं। निगम के वर्तमान चुनाव में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कांग्रेस प्रत्याशी रंजना रावत को अपने वार्ड-4 से 962 वोट मिले, लेकिन भाजपा प्रत्याशी शैलेंद्र रावत यहां से 815 वोट निकालकर ले जाने में कामयाब रहे। इसी तरह भाजपा प्रत्याशी को अपने वार्ड-32 से 1047 वोट मिले, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी उनके खेमे से 354 वोट लेने में ही कामयाब हो गईं।
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