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प्रशासन ने तीन अवैध आवास गिराए
अमर उजाला/कालागढ़/कोटद्वार।
Updated Mon, 14 Mar 2016 11:09 PM IST
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नाराज महिलाओं को समझाती पुलिसकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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एनजीटी के आदेश पर डीएम, एसपी पौड़ी की मौजूदगी में पुलिस और पीएसी की तीन बटालियनों की सुरक्षा में सिंचाई विभाग की रामगंगा बांध परियोजना की आवासीय कॉलोनी में प्रशासन ने तीन अवैध आवासों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। अवैध निर्माण को छोड़कर आवासों के ध्वस्तीकरण को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध जताया। इस बीच जनता व पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुई। कार्रवाई के विरोध में नई कालोनी और केंद्रीय कालोनी के बाजार पूरी तरह बंद रहे।
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सोमवार को नई कालोनी में पुलिस और पीएसी के जवानों के बीच सिंचाई विभाग के अधिकारियों की निशानदेही पर प्रशासन ने तीन मकानों को ध्वस्त कर दिया। ई हाजी इसरार अहमद के आवास 23, भगवानदास के आवास सी 275, व ए 24 को ध्वस्त कर दिया। आवास संख्या ई 23 के ध्वस्तीकरण का जनता ने जोरदार विरोध किया। जिस पर पुलिस व पीएसी ने लाठी फटका कर जनता को कार्रवाई से दूर कर दिया। लेकिन जनता के जबरदस्त विरोध के चलते ध्वस्तीकरण की कार्रवाई दो घंटे रुकी रही। दोपहर तीन बजे जब डीएम चंद्र शेखर भट्ट, और एसपी पौड़ी राजीव स्वरूप मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस को विरोध करने वाले लोगों को वहां से हटाने के निर्देश दिए। जिस पर पुलिस के लाठी फटकारते ही भगदड़ मच गई। भगदड़ में कई लोग गिरकर चोटिल हो गए। इस दौरान तीन बटालियन पीएसी मौके पर तैनात रही। ध्वस्त आवासों का सामान घरों के बाहर कर दिया गया। बिजली विभाग ने बिजली कनेक्शन काटे जाने की कार्रवाई भी साथ की। ईई सीमांत के अनुसार सिंचाई विभाग की कॉलोनी में 501 आवासों पर अवैध कब्जे हैं। इनकी सूची जिला अधिकारी को सौंप दी गई है।
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18 मार्च को एनजीटी के समक्ष रिपोर्ट का आदेश
उधर, स्थानीय नागरिक शंकर सिंघल, संतोष सैनी, हाजी इसरार अहमद का कहना है कि नौ मार्च 2016 की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि कोर जोन में एक अनधिकृत/अवैध निर्माण को ध्वस्त कर 18 मार्च को एनजीटी के समक्ष रिपोर्ट रखे जाने के आदेश दिए थे। लेकिन अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश होने के बाद सरकारी आवासों को ध्वस्त कर दिया गया। यह आवास सिंचाई विभाग का निर्माण हैं जिनका बाकायदा विभाग में नक्शा देखा जा सकता है। जनता ने सुप्रीम कोर्ट से यहां से हटाए जाने के बाद पुनर्वास की मांग की है।
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