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प्रशासन ने एनएच पर स्थित सुकई के रामेश्वर मंदिर समेत चार मंदिर ढहाए
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बैजरो। एसडीएम थलीसैंण के नेतृत्व में तहसील प्रशासन ने लगातार दूसरे दिन बीरोंखाल के अंतर्गत नेशनल हाईवे पर स्थित चार मंदिरों को जेसीबी से ढहा दिया। प्रशासन ने शनिवार को दीवा मंदिर जिवई, दुर्गा मंदिर ढुलकोली, सुकई स्थित रामेश्वर मंदिर और गडसारी स्थित हनुमान मंदिर को ध्वस्त किया। इस बीच क्षेत्रवासियों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन तहसील प्रशासन ने उन्हें समझा बुझाकर शांत करवा दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए थलीसैंण के एसडीएम अरविंद बिष्ट ने जहां शुक्रवार को जिवई स्थित राम मंदिर ध्वस्त किया था। तब ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए सुकई के रामेश्वर मंदिर को छोड़ दिया गया था, लेकिन शनिवार को प्रशासन ने सबसे पहले सुकई के रामेश्वर मंदिर पर जेसीबी चलाकर उसे ध्वस्त कराया। इसके बाद गडसारी स्थित हनुमान मंदिर, जिवई स्थित दीबा मंदिर और ग्राम ढुलकोली के दीबा मंदिर को प्रशासन की जेसीबी ने ढहा दिया। प्रशासन को सुकई के रामेश्वर मंदिर को ढहाने में लोगों का भारी विरोध झेलना पड़ा। मंदिर के टूटने की खबर से शनिवार सुबह से ही सुकई के ग्रामीण मंदिर प्रांगण में जमा होकर भजन कीर्तन करने लगे। एसडीएम अरविंद बिष्ट और थानाध्यक्ष संतोष कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें किसी तरह समझाकर शांत कराया। प्रशासन और एनएच के अधिकारियों ने क्षेत्रवासियों को भरोसा दिलाया कि उन्हें दूसरे स्थान पर मंदिर निर्माण में सहयोग करेंगे।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि सलोनधार स्थित काल भैरव के मंदिर को हटाने के लिए समय दे दिया गया, लेकिन बीरोंखाल के पांच मंदिरों को तोड़ने के लिए कोई समय तक नहीं दिया गया। क्षेत्रवासियों ने उनके मंदिरों को बचाने के लिए आगे न आने पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए थलीसैंण के एसडीएम अरविंद बिष्ट ने जहां शुक्रवार को जिवई स्थित राम मंदिर ध्वस्त किया था। तब ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए सुकई के रामेश्वर मंदिर को छोड़ दिया गया था, लेकिन शनिवार को प्रशासन ने सबसे पहले सुकई के रामेश्वर मंदिर पर जेसीबी चलाकर उसे ध्वस्त कराया। इसके बाद गडसारी स्थित हनुमान मंदिर, जिवई स्थित दीबा मंदिर और ग्राम ढुलकोली के दीबा मंदिर को प्रशासन की जेसीबी ने ढहा दिया। प्रशासन को सुकई के रामेश्वर मंदिर को ढहाने में लोगों का भारी विरोध झेलना पड़ा। मंदिर के टूटने की खबर से शनिवार सुबह से ही सुकई के ग्रामीण मंदिर प्रांगण में जमा होकर भजन कीर्तन करने लगे। एसडीएम अरविंद बिष्ट और थानाध्यक्ष संतोष कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें किसी तरह समझाकर शांत कराया। प्रशासन और एनएच के अधिकारियों ने क्षेत्रवासियों को भरोसा दिलाया कि उन्हें दूसरे स्थान पर मंदिर निर्माण में सहयोग करेंगे।
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क्षेत्रवासियों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि सलोनधार स्थित काल भैरव के मंदिर को हटाने के लिए समय दे दिया गया, लेकिन बीरोंखाल के पांच मंदिरों को तोड़ने के लिए कोई समय तक नहीं दिया गया। क्षेत्रवासियों ने उनके मंदिरों को बचाने के लिए आगे न आने पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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