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रेख डांडा में बनेगा अंतर्राष्ट्रीय आयुर्वेद शोध संस्थान, कोटद्वार में हुआ शिलान्यास
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- फोटो : amarujala
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कोटद्वार। वन और आयुष शिक्षा मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने शुक्रवार को कोटद्वार में चरेख डांडा में स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद शोध संस्थान का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही कोटद्वार के चरेख डांडा में संस्थान के भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा। इसी कार्यक्रम में वन मंत्री ने चंद्रमोहन सिंह नेगी राजकीय बेस चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी आवासों का लोकार्पण किया।
शुक्रवार को कोटद्वार के नजीबाबाद मार्ग पर स्थित भामा गार्डन में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को आना था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम रद्द होने से वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने ही कार्यक्रम में शिरकत की। वन मंत्री ने करीब चार सौ करोड़ की लागत से बनने वाले अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेदिक शोध संस्थान का शिलान्यास एवं पांच करोड़ की लागत से निर्मित चंद्रमोहन सिंह नेगी राजकीय बेस चिकित्सालय कोटद्वार के चिकित्साधिकारी आवासों का लोकार्पण किया। वन मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को आना था, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने से वह नहीं आ सके। उनके प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने स्वयं इस योजना का शिलान्यास किया।
वन मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान और पूरी दुनिया के लिए यह अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेदिक शोध संस्थान महत्वपूर्ण होगा। इसमें करीब 400 करोड़ की लागत आएगी। यहां हर बीमारी का उपचार तो होगा ही, साथ ही यहां आयुर्वेद पर शोध भी होंगे। शोध संस्थान में पांच पद वैज्ञानिकों के सृजित किए गए हैं। यहां हर्बल गार्डन भी बनाया जाएगा। हिमालय में उगने वाली हर जड़ी-बूटियां यहां पैदा कर उन पर शोध होगा।
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शुक्रवार को कोटद्वार के नजीबाबाद मार्ग पर स्थित भामा गार्डन में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को आना था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम रद्द होने से वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने ही कार्यक्रम में शिरकत की। वन मंत्री ने करीब चार सौ करोड़ की लागत से बनने वाले अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेदिक शोध संस्थान का शिलान्यास एवं पांच करोड़ की लागत से निर्मित चंद्रमोहन सिंह नेगी राजकीय बेस चिकित्सालय कोटद्वार के चिकित्साधिकारी आवासों का लोकार्पण किया। वन मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को आना था, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने से वह नहीं आ सके। उनके प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने स्वयं इस योजना का शिलान्यास किया।
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वन मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान और पूरी दुनिया के लिए यह अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेदिक शोध संस्थान महत्वपूर्ण होगा। इसमें करीब 400 करोड़ की लागत आएगी। यहां हर बीमारी का उपचार तो होगा ही, साथ ही यहां आयुर्वेद पर शोध भी होंगे। शोध संस्थान में पांच पद वैज्ञानिकों के सृजित किए गए हैं। यहां हर्बल गार्डन भी बनाया जाएगा। हिमालय में उगने वाली हर जड़ी-बूटियां यहां पैदा कर उन पर शोध होगा।
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