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धूमधाम से मनाया महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह का जन्मोत्सव
Updated Sun, 19 Aug 2018 10:28 PM IST
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बैजरो। दुनाव बाडियों विकास समिति की ओर से महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह रावत की जयंती उनके पैतृक गांव दुनाव में धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर स्थानीय विद्यालयों के छात्रों व ग्रामीणों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियां देकर समारोह में समा बांधा।
रविवार को दुनाव में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक दलीप रावत ने महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह के स्मारक पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर समारोह का शुभारंभ किया। विधायक दिलीप रावत ने कहा कि जसवंत सिंह रावत के शौर्य और पराक्रम को हमेशा याद रखा जाएगा। कार्यक्रम में दुनाव बाडियों विकास समिति के रघुवीर रावत ने जसवंत सिंह रावत के शौर्य और पराक्रम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वह मात्र 21 साल की उम्र में शहीद हो गए थे। जसवंत सिंह रावत दिसंबर 1959 को चौथी गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए। 1962 में जब चीन ने भारत पर हमला किया, तब त्वांग घाटी में नूरानांग चोटी की सुरक्षा का जिम्मा इन पर था। जसवंत सिंह रावत ने तीन दिन तक चीन की सेना को रोके रखा और 300 सैनिकों को मार गिराया। इनकी बहादुरी का लोहा चीनी फौज ने भी माना था। भारत सरकार ने उस युद्ध में एक मात्र पुरस्कार बैटल ऑफ नूरानांग जसवंत सिंह रावत को मरणोपरांत दिया। बाद में उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्हें मरणोपरांत भी प्रमोशन मिलते रहे और वह ऑनरेनरी कैप्टन पद से रिटायर हुए। कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि दर्शन सिंह रिंगोडा, प्रधान संघ के अध्यक्ष मेहरबान सिंह रावत, जयदीप नेगी, यशपाल गोरला, जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन क्षेत्र पंचायत सदस्य मदन सिंह रावत ने किया।
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रविवार को दुनाव में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक दलीप रावत ने महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह के स्मारक पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर समारोह का शुभारंभ किया। विधायक दिलीप रावत ने कहा कि जसवंत सिंह रावत के शौर्य और पराक्रम को हमेशा याद रखा जाएगा। कार्यक्रम में दुनाव बाडियों विकास समिति के रघुवीर रावत ने जसवंत सिंह रावत के शौर्य और पराक्रम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वह मात्र 21 साल की उम्र में शहीद हो गए थे। जसवंत सिंह रावत दिसंबर 1959 को चौथी गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए। 1962 में जब चीन ने भारत पर हमला किया, तब त्वांग घाटी में नूरानांग चोटी की सुरक्षा का जिम्मा इन पर था। जसवंत सिंह रावत ने तीन दिन तक चीन की सेना को रोके रखा और 300 सैनिकों को मार गिराया। इनकी बहादुरी का लोहा चीनी फौज ने भी माना था। भारत सरकार ने उस युद्ध में एक मात्र पुरस्कार बैटल ऑफ नूरानांग जसवंत सिंह रावत को मरणोपरांत दिया। बाद में उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्हें मरणोपरांत भी प्रमोशन मिलते रहे और वह ऑनरेनरी कैप्टन पद से रिटायर हुए। कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि दर्शन सिंह रिंगोडा, प्रधान संघ के अध्यक्ष मेहरबान सिंह रावत, जयदीप नेगी, यशपाल गोरला, जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन क्षेत्र पंचायत सदस्य मदन सिंह रावत ने किया।
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