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ग्रामीणों ने श्रमदान कर बहाल की गांव की पेयजल व्यवस्था
Updated Sat, 03 Nov 2018 10:56 PM IST
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कोटद्वार। चार महीने से क्षतिग्रस्त कांडई-चरेख पेयजल योजना की जब विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने सुध नहीं ली तो ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए लाइनों की मरम्मत कर पेयजल व्यवस्था बहाल कर एक मिसाल पेश की है।
दुगड्डा विकासखंड की कांडई ग्राम पंचायत के लिए नब्बे के दशक में बनी कांडई-चरेख पेयजल योजना पुरानी हो चुकी है। जर्जर हाल पाइप लाइन इस बरसात में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। क्षेत्र पंचायत सदस्य जगदीश बेबनी का कहना है कि उन्होंने लाइन टूटने की जानकारी 13 जुलाई को जिला आपदा कंट्रोल रूम को भी दी, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब विभाग की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीणों ने पैसे मिलाकर पाइप लाइनों को जोड़ने के बाद श्रमदान कर गांव में पानी चला दिया।
श्रमदान करने वालों में डा. दिवाकर बेबनी, बसंत सिंह, हरेंद्र सिंह, प्रमोद सिंह, श्रीपाल सिंह और गबर सिंह प्रमुख रहे। उनका कहना है कि इस लाइन से कांडई के 45 परिवार जुड़े हैं। योजना का पुनर्गठन हुए बिना काम नहीं चल सकता है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता एलसी रमोला का कहना है कि जल निगम इसके लिए पुनर्गठन योजना तैयार कर रहा है।
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दुगड्डा विकासखंड की कांडई ग्राम पंचायत के लिए नब्बे के दशक में बनी कांडई-चरेख पेयजल योजना पुरानी हो चुकी है। जर्जर हाल पाइप लाइन इस बरसात में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। क्षेत्र पंचायत सदस्य जगदीश बेबनी का कहना है कि उन्होंने लाइन टूटने की जानकारी 13 जुलाई को जिला आपदा कंट्रोल रूम को भी दी, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब विभाग की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीणों ने पैसे मिलाकर पाइप लाइनों को जोड़ने के बाद श्रमदान कर गांव में पानी चला दिया।
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श्रमदान करने वालों में डा. दिवाकर बेबनी, बसंत सिंह, हरेंद्र सिंह, प्रमोद सिंह, श्रीपाल सिंह और गबर सिंह प्रमुख रहे। उनका कहना है कि इस लाइन से कांडई के 45 परिवार जुड़े हैं। योजना का पुनर्गठन हुए बिना काम नहीं चल सकता है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता एलसी रमोला का कहना है कि जल निगम इसके लिए पुनर्गठन योजना तैयार कर रहा है।
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