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बजट 3.86 करोड़, नहीं मिला धेला
Updated Fri, 12 Oct 2018 11:00 PM IST
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कोटद्वार। बेस अस्पताल कोटद्वार उधार की व्यवस्थाओं पर चल रहा है। अस्पताल का बजट 3.86 करोड़ का है, लेकिन वित्तीय वर्ष के साढ़े छह महीने बीत जाने के बाद भी अस्पताल को एक धेला तक नहीं मिला है। उपेक्षा का आलम यह है कि गत वर्ष भी अस्पताल प्रबंधन को 3.80 करोड़ के बजट के सापेक्ष शासन से केवल 75 लाख रुपये की मिल पाए हैं। इस कारण अस्पताल पर पिछले वर्ष का भी लाखों बकाया चल रहा है। ऐसे में यदि जल्द बजट नहीं मिला तो अस्पताल की व्यवस्थाएं कभी भी चरमरा सकती हैं।
कोटद्वार बेस अस्पताल पर पौड़ी जिले की 70 फीसदी से अधिक जनसंख्या उपचार के लिए निर्भर है। पौड़ी जनपद ही नहीं, बल्कि कोटद्वार से सटे यूपी के कई गांव सहूलियत के चलते इलाज कराने के लिए कोटद्वार अस्पताल पर निर्भर हैं। अस्पताल की व्यवस्थाओं को ठीक ढंग से चलाने के लिए समय से बजट न मिलने के कारण जनरेटर के लिए डीजल, धुलाई, भोजन, बिजली खर्च, सफाई पर हर माह होने वाले खर्च उधार पर चल रहे हैं। उधार की रकम बढ़ने से ओपीडी से लेकर एमरजेंसी और आपरेशन थियेटर की व्यवस्थाओं को संचालित करना भारी पड़ रहा है। अस्पताल को हर माह करीब साढ़े छह से सात लाख रुपये के यूजर्स चार्जेज प्राप्त होते हैं, जिसमें से आधी रकम राजकोष में जमा करानी अनिवार्य है। यह आधी रकम बिजली व डीजल जैसी जरूरी वस्तुओं के लिए भी पूरी नहीं पड़ती।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित सरकारी अस्पताल की संचालन समिति की बैठक में चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 3.86 करोड़ का बजट तो पारित कर दिया गया, लेकिन इस बजट में से अभी तक एक धेला तक नहीं मिला। सात आठ महीने से धुलाई, सफाई और भोजन का पैसा पेंडिंग पड़ा है।
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रूटीन मेंटेनेंस और अब तक की बकाया धनराशि के लिए शासन से बजट मांगा गया है। महानिदेशालय से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जल्द बजट रिलीज होने की उम्मीद है।
-आईएस सामंत, सीएमएस राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार
-फोटो
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कोटद्वार बेस अस्पताल पर पौड़ी जिले की 70 फीसदी से अधिक जनसंख्या उपचार के लिए निर्भर है। पौड़ी जनपद ही नहीं, बल्कि कोटद्वार से सटे यूपी के कई गांव सहूलियत के चलते इलाज कराने के लिए कोटद्वार अस्पताल पर निर्भर हैं। अस्पताल की व्यवस्थाओं को ठीक ढंग से चलाने के लिए समय से बजट न मिलने के कारण जनरेटर के लिए डीजल, धुलाई, भोजन, बिजली खर्च, सफाई पर हर माह होने वाले खर्च उधार पर चल रहे हैं। उधार की रकम बढ़ने से ओपीडी से लेकर एमरजेंसी और आपरेशन थियेटर की व्यवस्थाओं को संचालित करना भारी पड़ रहा है। अस्पताल को हर माह करीब साढ़े छह से सात लाख रुपये के यूजर्स चार्जेज प्राप्त होते हैं, जिसमें से आधी रकम राजकोष में जमा करानी अनिवार्य है। यह आधी रकम बिजली व डीजल जैसी जरूरी वस्तुओं के लिए भी पूरी नहीं पड़ती।
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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित सरकारी अस्पताल की संचालन समिति की बैठक में चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 3.86 करोड़ का बजट तो पारित कर दिया गया, लेकिन इस बजट में से अभी तक एक धेला तक नहीं मिला। सात आठ महीने से धुलाई, सफाई और भोजन का पैसा पेंडिंग पड़ा है।
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रूटीन मेंटेनेंस और अब तक की बकाया धनराशि के लिए शासन से बजट मांगा गया है। महानिदेशालय से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जल्द बजट रिलीज होने की उम्मीद है।
-आईएस सामंत, सीएमएस राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार
-फोटो