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राम-भरत मिलाप देख भाव-विभोर हुए दर्शक
Updated Fri, 28 Sep 2018 10:20 PM IST
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कोटद्वार। श्री बाल रामलीला कमेटी कोटद्वार की ओर से आयोजित रामलीला के आठवें दिन राम-भरत मिलाप का मंचन किया गया। इस भावुक दृश्य को देखकर दर्शकों की आंखें भर आईं।
बृहस्पतिवार को आयोजित रामलीला का शुभारंभ जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला व लोसा के पूर्व अध्यक्ष गुमान थापा ने रिबन काटकर किया। उन्होंने कहा कि रामायण से मानव जीवन में त्याग व सदैव सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। रामलीला के आठवें दिन के मंचन का प्रारंभ भरत के अयोध्या आने से होता है। इसके बाद भरत को जब राम के 14 वर्ष के वनवास का पता चलता है तो वह राम को लेने वन की ओर चले जाते हैं। भरत राम से मिलकर फूट-फूटकर रोते हैं और अपना मुकुट उनके चरणों में रखकर अयोध्या जाकर उनके राज करने और खुद वन में रहकर पिता के आज्ञा पालन करने का प्रस्ताव रखते हैं। भरत के कहने के बाद भी भगवान श्रीराम वापस नहीं आते और भरत को अपनी खड़ाऊ देते हैं। भाई-प्रेम के इस भावुक दृश्य को देखकर दर्शकों की आंखें भर आईं।
कार्यक्रम में कमेटी के अध्यक्ष ज्ञान सिंह नेगी, कोषाध्यक्ष घनश्याम शर्मा, मीडिया प्रभारी अंकित अग्रवाल, आनंद सिंघानिया, प्रवीन भाटिया, ओम प्रकाश भाटिया, नितिन गुप्ता व विजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को आयोजित रामलीला का शुभारंभ जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला व लोसा के पूर्व अध्यक्ष गुमान थापा ने रिबन काटकर किया। उन्होंने कहा कि रामायण से मानव जीवन में त्याग व सदैव सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। रामलीला के आठवें दिन के मंचन का प्रारंभ भरत के अयोध्या आने से होता है। इसके बाद भरत को जब राम के 14 वर्ष के वनवास का पता चलता है तो वह राम को लेने वन की ओर चले जाते हैं। भरत राम से मिलकर फूट-फूटकर रोते हैं और अपना मुकुट उनके चरणों में रखकर अयोध्या जाकर उनके राज करने और खुद वन में रहकर पिता के आज्ञा पालन करने का प्रस्ताव रखते हैं। भरत के कहने के बाद भी भगवान श्रीराम वापस नहीं आते और भरत को अपनी खड़ाऊ देते हैं। भाई-प्रेम के इस भावुक दृश्य को देखकर दर्शकों की आंखें भर आईं।
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कार्यक्रम में कमेटी के अध्यक्ष ज्ञान सिंह नेगी, कोषाध्यक्ष घनश्याम शर्मा, मीडिया प्रभारी अंकित अग्रवाल, आनंद सिंघानिया, प्रवीन भाटिया, ओम प्रकाश भाटिया, नितिन गुप्ता व विजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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