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गढ़वाल राइफल्स के मुक्केबाज सतेंद्र को मिला रजत पदक
Updated Mon, 07 Aug 2017 10:40 PM IST
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लैंसडौन/गोपेश्वर। चमोली के धूनी गांव निवासी बॉक्सर सतेंद्र सिंह ने फिलीपींस के पुएर्टो प्रिसेंसा में आयोजित एशियन जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर लैंसडौन के ब्वॉयज स्पोर्ट्स कंपनी के कैडेट सतेंद्र सिंह का सोमवार को 80 किग्रा वजन में उज्बेकिस्तान के मुक्केबाज अलमतोव शोकरूख से फाइनल मुकाबला हुआ। दोनों मुक्केबाज अंत तक एक दूसरे पर हावी रहे। अंत में सतेंद्र को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। कोच योगेंद्र बोरा ने बताया कि सतेंद्र का चयन अब जूनियर वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए भी हो गया है।
सतेंद्र गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट केंद्र के ब्वॉयज स्पोर्ट्स कंपनी का छात्र है। भारतीय जूनियर मुक्केबाजी टीम के लिए जुलाई में गुवाहाटी में संपन्न जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका चयन एशियन जूनियर चैंपियनशिप के लिए हुआ था। एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी सेना के इस कै डेट का सफर उपलब्धियों से भरा रहा। सतेंद्र ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन के लिन शेंग हूव, साउथ कोरिया के किम हूय वो, कजाकिस्तान के नामचीन मुक्केबाज अर्नुर अखमेटजेनोव को पराजित कर फाइनल में जगह बनाई। अपने कैडेट की उपलब्धि पर कमान अधिकारी इंद्रजीत चटर्जी, डिप्टी कमांडेंट कर्नल शलभ सनवाल, कैंट के उपाध्यक्ष डा. एसपी नैथानी ने इसे राज्य का गौरव बताया।
सतेंद्र को शुरू से ही था बॉक्सिंग का जुनून
गोपेश्वर। फिलीपींस में पुएर्टो प्रिसेंसा में एशियन जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर जीतने वाले सतेंद्र गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता महेंद्र सिंह खेतीबाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सतेंद्र का बॉक्सिंग के प्रति जुनून शुरू से ही था, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह उसकी ट्रेनिंग नहीं ले पा रहे थे। तब स्पोेर्ट्स की जानकारी रखने वाले गांव के शिक्षक योगेंद्र बोरा ने सतेंद्र की शारीरिक क्षमता को देखते हुए उसे बॉक्सिंग सिखाने की ठानी। वर्ष 2010 में योगेंद्र बोरा ने सतेंद्र की बॉक्सिंग ट्रेनिंग शुरू की। एक वर्ष बाद ही 2011 में उसका चयन महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए हो गया। उसने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी और वर्ष 2013 में उसका चयन गढ़वाल राइफल्स की ब्वॉयज स्पोर्ट्स कंपनी के लिए हो गया। वर्तमान में सतेंद्र सेना की ब्वॉयज स्पोर्ट्स कंपनी का छात्र है।
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अवसरों की कमी के कारण नहीं निखरती प्रतिभा
गोपेश्वर। सतेंद्र के अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भाग लेने से जहां सतेंद्र के कोच योगेंद्र खुश हैं, वहीं सोमवार को फिलिपिंस में हुए फाइनल मैच में सतेंद्र के प्रदर्शन से योगेंद्र मायूस नजर आये। उनका कहना है कि वह और भी बेहतर कर सकता था, लेकिन टेक्निक की कमी के चलते परिणाम आशा के अनुरूप नहीं मिले हैं। साथ उन्होंने कहा कि राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाएं बहुत हैं, लेकिन अवसरों की कमी की कमी के चलते प्रतिभा निखर नहीं पा रही हैं। उन्होंने राज्य सरकारों से खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की बात कही।
सतेंद्र गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट केंद्र के ब्वॉयज स्पोर्ट्स कंपनी का छात्र है। भारतीय जूनियर मुक्केबाजी टीम के लिए जुलाई में गुवाहाटी में संपन्न जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका चयन एशियन जूनियर चैंपियनशिप के लिए हुआ था। एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी सेना के इस कै डेट का सफर उपलब्धियों से भरा रहा। सतेंद्र ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन के लिन शेंग हूव, साउथ कोरिया के किम हूय वो, कजाकिस्तान के नामचीन मुक्केबाज अर्नुर अखमेटजेनोव को पराजित कर फाइनल में जगह बनाई। अपने कैडेट की उपलब्धि पर कमान अधिकारी इंद्रजीत चटर्जी, डिप्टी कमांडेंट कर्नल शलभ सनवाल, कैंट के उपाध्यक्ष डा. एसपी नैथानी ने इसे राज्य का गौरव बताया।
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सतेंद्र को शुरू से ही था बॉक्सिंग का जुनून
गोपेश्वर। फिलीपींस में पुएर्टो प्रिसेंसा में एशियन जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर जीतने वाले सतेंद्र गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता महेंद्र सिंह खेतीबाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सतेंद्र का बॉक्सिंग के प्रति जुनून शुरू से ही था, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह उसकी ट्रेनिंग नहीं ले पा रहे थे। तब स्पोेर्ट्स की जानकारी रखने वाले गांव के शिक्षक योगेंद्र बोरा ने सतेंद्र की शारीरिक क्षमता को देखते हुए उसे बॉक्सिंग सिखाने की ठानी। वर्ष 2010 में योगेंद्र बोरा ने सतेंद्र की बॉक्सिंग ट्रेनिंग शुरू की। एक वर्ष बाद ही 2011 में उसका चयन महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए हो गया। उसने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी और वर्ष 2013 में उसका चयन गढ़वाल राइफल्स की ब्वॉयज स्पोर्ट्स कंपनी के लिए हो गया। वर्तमान में सतेंद्र सेना की ब्वॉयज स्पोर्ट्स कंपनी का छात्र है।
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अवसरों की कमी के कारण नहीं निखरती प्रतिभा
गोपेश्वर। सतेंद्र के अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भाग लेने से जहां सतेंद्र के कोच योगेंद्र खुश हैं, वहीं सोमवार को फिलिपिंस में हुए फाइनल मैच में सतेंद्र के प्रदर्शन से योगेंद्र मायूस नजर आये। उनका कहना है कि वह और भी बेहतर कर सकता था, लेकिन टेक्निक की कमी के चलते परिणाम आशा के अनुरूप नहीं मिले हैं। साथ उन्होंने कहा कि राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाएं बहुत हैं, लेकिन अवसरों की कमी की कमी के चलते प्रतिभा निखर नहीं पा रही हैं। उन्होंने राज्य सरकारों से खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की बात कही।