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शांतिभंग में चालान होने और बैठकों से भड़के पार्षद प्रत्याशी
Updated Wed, 14 Nov 2018 10:19 PM IST
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कोटद्वार। नगर निगम के चुनाव में शांति भंग के चालान कटने और तहसील, कोतवाली में हर रोज की बैठकों से पार्षद प्रत्याशी हलकान हैं। बुधवार को कोतवाली में हुई बैठक में प्रत्याशियों का गुस्सा अधिकारियों के सामने फूट पड़ा। प्रत्याशी बोले कि हर तीसरे दिन की बैठक और आय-व्यय के ब्यौरा तलब करने से उन्हें प्रचार के लिए समय ही नहीं मिल रहा है। प्रत्याशियों ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि उम्मीदवारों के साथ अपराधियों जैसा सलूक किया जा रहा है। उन्हें ऐसा लग रहा है कि चुनाव लड़कर कोई बड़ी गलती कर दी हो।
नगर निगम के चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ ही प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है। सभी प्रत्याशी अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगे हैं। नगर निगम के पार्षद प्रत्याशियों का कहना है कि उनका लड़ाई-झगड़े से कोई लेना देना नहीं है, फिर भी उनके शांतिभंग में चालान काट दिए गए। उनके मुचलके भी भरवाए दिए गए। कभी तहसील तो कभी कोतवाली में बैठकों का दौर चल रहा है। कई बार प्रत्याशियों से आय-व्यय का ब्योरा मांगा जा रहा है। प्रत्याशियों का आरोप है कि पहले तहसील प्रशासन ने सभी से निजी मुचलके भरवाए। अब पुलिस प्रशासन की ओर से सीआरपीसी की धारा 107/116 में उनके चालान काट दिए गए हैं, जिससे उन्हें लगातार तहसील और कोतवाली के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। पार्षद प्रत्याशी चंद्रेश लखेड़ा ने कोतवाली में प्रत्याशियों की बैठक में पुलिस प्रशासन के इस रवैये का पुरजोर विरोध किया। कहा कि उनका पूरा दिन तहसील और कोतवाली में ही खराब हो रहा है, जिससे वे चुनाव प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। उनके साथ अपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। उनकी इस बात पर अन्य प्रत्याशियों ने भी सहमति जताई।
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नगर निगम के चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ ही प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है। सभी प्रत्याशी अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगे हैं। नगर निगम के पार्षद प्रत्याशियों का कहना है कि उनका लड़ाई-झगड़े से कोई लेना देना नहीं है, फिर भी उनके शांतिभंग में चालान काट दिए गए। उनके मुचलके भी भरवाए दिए गए। कभी तहसील तो कभी कोतवाली में बैठकों का दौर चल रहा है। कई बार प्रत्याशियों से आय-व्यय का ब्योरा मांगा जा रहा है। प्रत्याशियों का आरोप है कि पहले तहसील प्रशासन ने सभी से निजी मुचलके भरवाए। अब पुलिस प्रशासन की ओर से सीआरपीसी की धारा 107/116 में उनके चालान काट दिए गए हैं, जिससे उन्हें लगातार तहसील और कोतवाली के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। पार्षद प्रत्याशी चंद्रेश लखेड़ा ने कोतवाली में प्रत्याशियों की बैठक में पुलिस प्रशासन के इस रवैये का पुरजोर विरोध किया। कहा कि उनका पूरा दिन तहसील और कोतवाली में ही खराब हो रहा है, जिससे वे चुनाव प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। उनके साथ अपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। उनकी इस बात पर अन्य प्रत्याशियों ने भी सहमति जताई।
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