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बहेड़ा स्रोत और आम गदेरा से कोठला, मवाकोट में हुई तबाही
Updated Thu, 30 Aug 2018 10:04 PM IST
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कोटद्वार। बहेड़ा स्रोत और आम गदेरा ने बीते शनिवार को भाबर क्षेत्र के अंतर्गत मवाकोट, सत्तीचौड़ व नंदपुर में भारी तबाही मचाई है। मवाकोट में आम गदेरे में आई बाढ़ से गेंद मेला मैदान मलबे से अटा पड़ा है। आपदा और बाढ़ से बाईं मालन नहर मवाकोट में मलबे से पटी है, जिससे नहर में सिंचाई का पानी नहीं आ पा रहा है।
गत 25 अगस्त को आई आपदा ने क्षेत्र में एक बार फिर एक साल पहले 3/4 अगस्त की आपदा जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। गत शनिवार की आपदा ने उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। नंदपुर निवासी मदन मोहन जोशी, कुशलानंद भट्ट, कल्याण सिंह, रोशनलाल कुकरेती का कहना है कि गत वर्ष कण्वाश्रम के जंगल में बादल फटने से बहेड़ा स्रोत और आम गदेरा में मलबा आने से इन गदेरों का रुख मवाकोट गांव की ओर हो गया था। आपदा के एक साल बाद भी शासन और प्रशासन ने इन गदेरों की सुध नहीं ली, जिससे गत 25 अगस्त को हुई भारी बारिश से मवाकोट, नंदपुर, घमंडपुर में भारी तबाही हुई है। स्थिति यह है कि जहां मवाकोट गेंद मेला मैदान मलबे से अटा हुआ है, वहीं मैदान में स्थित जल संस्थान के पंप हाउस को भी नुकसान पहुंचा है। मलबे और बाढ़ से जगदेव मंदिर के आसपास के लोगों के घरों और खेतों में मलबा घुस गया। मलबे से कई बीघा फसल चौपट हो गई है। मवाकोट में मलबा भरने से सिंचाई गूल बंद पड़ी हुई है। आपदा के बाद अब काश्तकारों के समक्ष सिंचाई की समस्या खड़ी हो गई है। बाईं मालन नहर से कोठला, मवाकोट, नंदपुर, घमंडपुर, निंबूचौड़, खूनीबड़, दुर्गापुरी के काश्तकार प्रभावित हुए हैं। कोठला निवासी कुलदीप सिंह, मवाकोट निवासी संतोषी देवी व पूनम का कहना है कि आम गदेरा और बहेड़ा स्रोत से गांव को खतरा बना हुआ है। उन्होंने शासन, प्रशासन से गदेरों के पानी को मालन नदी में डायवर्ट करने और सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की है।
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गत 25 अगस्त को आई आपदा ने क्षेत्र में एक बार फिर एक साल पहले 3/4 अगस्त की आपदा जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। गत शनिवार की आपदा ने उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। नंदपुर निवासी मदन मोहन जोशी, कुशलानंद भट्ट, कल्याण सिंह, रोशनलाल कुकरेती का कहना है कि गत वर्ष कण्वाश्रम के जंगल में बादल फटने से बहेड़ा स्रोत और आम गदेरा में मलबा आने से इन गदेरों का रुख मवाकोट गांव की ओर हो गया था। आपदा के एक साल बाद भी शासन और प्रशासन ने इन गदेरों की सुध नहीं ली, जिससे गत 25 अगस्त को हुई भारी बारिश से मवाकोट, नंदपुर, घमंडपुर में भारी तबाही हुई है। स्थिति यह है कि जहां मवाकोट गेंद मेला मैदान मलबे से अटा हुआ है, वहीं मैदान में स्थित जल संस्थान के पंप हाउस को भी नुकसान पहुंचा है। मलबे और बाढ़ से जगदेव मंदिर के आसपास के लोगों के घरों और खेतों में मलबा घुस गया। मलबे से कई बीघा फसल चौपट हो गई है। मवाकोट में मलबा भरने से सिंचाई गूल बंद पड़ी हुई है। आपदा के बाद अब काश्तकारों के समक्ष सिंचाई की समस्या खड़ी हो गई है। बाईं मालन नहर से कोठला, मवाकोट, नंदपुर, घमंडपुर, निंबूचौड़, खूनीबड़, दुर्गापुरी के काश्तकार प्रभावित हुए हैं। कोठला निवासी कुलदीप सिंह, मवाकोट निवासी संतोषी देवी व पूनम का कहना है कि आम गदेरा और बहेड़ा स्रोत से गांव को खतरा बना हुआ है। उन्होंने शासन, प्रशासन से गदेरों के पानी को मालन नदी में डायवर्ट करने और सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की है।
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