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ग्राम पंचायतों के अभिलेख जमा करवाने पर भड़के ग्रामीण
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:01 PM IST
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कोटद्वार। भाबर की 35 ग्राम पंचायतों के 73 गांवों को नगर निगम में शामिल करने के विरोध के बीच जिला प्रशासन की ओर से पंचायतों के अभिलेख जमा करवाने और नगर निकाय में हस्तगत कराने के फरमान से ग्रामीण भड़के हुए हैं। उन्होंने पौड़ी प्रशासन पर जनभावनाओं की उपेक्षा का आरोप लगाया। चेतावनी दी कि 16 फरवरी से पूर्व यदि पंचायतों के अभिलेख जमा करवाए गए तो इसे कोर्ट की अवमानना समझा जाएगा। इसके लिए अलग से याचिका दाखिल की जाएगी।
भाबर के ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने पौड़ी जिला प्रशासन पर नगर निगम के मसले पर जनभावनाओं की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि नगर निगम विरोध संघर्ष समिति इस मसले पर नैनीताल हाईकोर्ट की शरण में गई है। कोर्ट इस मसले पर 16 फरवरी को सुनवाई करेगा। तब तक ग्राम पंचायतें पूर्ववत काम करती रहेंगी। इस बीच प्रशासन की ओर से संबंधित ग्राम पंचायतों में कराए जाने वाले नगर निगम के वार्डों का परिसीमन, चुनाव के लिए नगर निकाय मतदाता सूची समेत सभी कार्य गैरकानूनी समझे जाएंगे। ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष सुरेश रावत, डबल सिंह रावत, चंद्रप्रकाश नैथानी और संजय पंथवाल समेत पंचायत प्रतिनिधियों ने कह कि कोटद्वार नगर से ग्राम पंचायतों के हालात बेहतर हैं। उन्होंने सवाल किया कि जो नगर निकाय चार साल से बस अड्डे का निर्माण नहीं करा पाया, वह 73 गांवों की व्यवस्थाएं कैसे संभालेगा। कोटद्वार भाबर के हाल भी सत्तारूढ़ दल और प्रशासन मोटर नगर के गड्ढे जैसा करना चाहता है। चेतावनी दी कि यदि हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले ग्राम पंचायतों के अभिलेख जमा करवाए, या गांवों में नगर निकास के चुनाव से संबंधित कार्रवाई की गई तो इस मामले में कोर्ट की अवमानना का याचिका दायर की जाएगी। जिसके लिए आदेश निकालने वाले संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
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संघर्ष समिति ने डीएम समेत सचिव शहरी विकास को भेजा नोटिस
कोटद्वार। नगर निगम विरोध संघर्ष समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण ने शहरी विकास के सचिव और निदेशक के साथ ही जिलाधिकारी गढ़वाल को दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के तहत नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया कि संघर्ष समिति बनाम उत्तराखंड सरकार के विचाराधीन वाद और जारी स्टे आर्डर के बीच नगर निगम की चुनाव संबंधी प्रक्रिया कराया जाना पूरी तरह गलत और कोर्ट की अवमानना है। नोटिस में कहा गया कि इस बीच शासन और प्रशासन की ओर से नगर निगम के चुनाव और चुनावी प्रक्रिया के लिए यदि पंचायतों के अधिकार छीनने और अन्य आदेश जारी किए जाएंगे तो संबंधित अधिकारी इसके लिए व्यक्तिगत जिम्मेदार माने जाएंगे।
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जारी
चंद्रमोहन शुक्ला
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भाबर के ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने पौड़ी जिला प्रशासन पर नगर निगम के मसले पर जनभावनाओं की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि नगर निगम विरोध संघर्ष समिति इस मसले पर नैनीताल हाईकोर्ट की शरण में गई है। कोर्ट इस मसले पर 16 फरवरी को सुनवाई करेगा। तब तक ग्राम पंचायतें पूर्ववत काम करती रहेंगी। इस बीच प्रशासन की ओर से संबंधित ग्राम पंचायतों में कराए जाने वाले नगर निगम के वार्डों का परिसीमन, चुनाव के लिए नगर निकाय मतदाता सूची समेत सभी कार्य गैरकानूनी समझे जाएंगे। ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष सुरेश रावत, डबल सिंह रावत, चंद्रप्रकाश नैथानी और संजय पंथवाल समेत पंचायत प्रतिनिधियों ने कह कि कोटद्वार नगर से ग्राम पंचायतों के हालात बेहतर हैं। उन्होंने सवाल किया कि जो नगर निकाय चार साल से बस अड्डे का निर्माण नहीं करा पाया, वह 73 गांवों की व्यवस्थाएं कैसे संभालेगा। कोटद्वार भाबर के हाल भी सत्तारूढ़ दल और प्रशासन मोटर नगर के गड्ढे जैसा करना चाहता है। चेतावनी दी कि यदि हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले ग्राम पंचायतों के अभिलेख जमा करवाए, या गांवों में नगर निकास के चुनाव से संबंधित कार्रवाई की गई तो इस मामले में कोर्ट की अवमानना का याचिका दायर की जाएगी। जिसके लिए आदेश निकालने वाले संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
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संघर्ष समिति ने डीएम समेत सचिव शहरी विकास को भेजा नोटिस
कोटद्वार। नगर निगम विरोध संघर्ष समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण ने शहरी विकास के सचिव और निदेशक के साथ ही जिलाधिकारी गढ़वाल को दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के तहत नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया कि संघर्ष समिति बनाम उत्तराखंड सरकार के विचाराधीन वाद और जारी स्टे आर्डर के बीच नगर निगम की चुनाव संबंधी प्रक्रिया कराया जाना पूरी तरह गलत और कोर्ट की अवमानना है। नोटिस में कहा गया कि इस बीच शासन और प्रशासन की ओर से नगर निगम के चुनाव और चुनावी प्रक्रिया के लिए यदि पंचायतों के अधिकार छीनने और अन्य आदेश जारी किए जाएंगे तो संबंधित अधिकारी इसके लिए व्यक्तिगत जिम्मेदार माने जाएंगे।
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जारी
चंद्रमोहन शुक्ला