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चैक बाउंस के मामले में आरोपी को एक साल का कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड
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कोटद्वार। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ सिविल जज सीनियर डिवीजन इंदु शर्मा की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी को एक वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
परिवादी के अधिवक्ता प्रकाश सिंह नेगी और आशुतोष कंडवाल ने बताया कि भाबर क्षेत्र के ग्राम खूनीबड़ निवासी सुभाष चंद्र तिवारी पुत्र गजेंद्र प्रसाद ने गत 7 अप्रैल 2017 को कोटद्वार थाने में एक तहरीर दी थी। तहरीर में कहा गया कि खतेंद्र पाल सिंह नेगी पुत्र भोपाल सिंह नेगी निवासी ग्राम कोटा तल्ला पट्टी मल्ला बदलपुर दुधारखाल ने रोड कटिंग के लिए उससे जेसीबी मशीन किराए पर ली थी, जिसके मद में उसने परिवादी को दिसंबर, 2016 में 90 हजार रुपये किराया देने का वायदा किया था। एक दिसंबर, 2016 को सतेंद्र ने उसे जिला सहकारी बैंक की लैंसडौंन शाखा का 90 हजार का एक चेक दिया। 13 दिसंबर, 2016 को भुगतान के लिए चेक को बैंक में लगाया गया, जो बाउंस हो गया। आरोपी के कहने पर चेक को बैंक खाते में दोबारा लगाया गया, लेकिन 9 फरवरी 2017 को पुन: चेक बाउंस हो गया। अधिवक्ता के माध्यम से उसे नोटिस भेजकर भुगतान करने को कहा गया, लेकिन आरोपी ने भुगतान नहीं किया।
धनराशि का भुगतान न होने पर परिवादी ने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया। दलीलें और पत्रावलियों पर उपलबध्य साक्ष्य के आधार पर आरोपी खतेंद्र सिंह नेगी को दोषी पाते हुए एक साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।.
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परिवादी के अधिवक्ता प्रकाश सिंह नेगी और आशुतोष कंडवाल ने बताया कि भाबर क्षेत्र के ग्राम खूनीबड़ निवासी सुभाष चंद्र तिवारी पुत्र गजेंद्र प्रसाद ने गत 7 अप्रैल 2017 को कोटद्वार थाने में एक तहरीर दी थी। तहरीर में कहा गया कि खतेंद्र पाल सिंह नेगी पुत्र भोपाल सिंह नेगी निवासी ग्राम कोटा तल्ला पट्टी मल्ला बदलपुर दुधारखाल ने रोड कटिंग के लिए उससे जेसीबी मशीन किराए पर ली थी, जिसके मद में उसने परिवादी को दिसंबर, 2016 में 90 हजार रुपये किराया देने का वायदा किया था। एक दिसंबर, 2016 को सतेंद्र ने उसे जिला सहकारी बैंक की लैंसडौंन शाखा का 90 हजार का एक चेक दिया। 13 दिसंबर, 2016 को भुगतान के लिए चेक को बैंक में लगाया गया, जो बाउंस हो गया। आरोपी के कहने पर चेक को बैंक खाते में दोबारा लगाया गया, लेकिन 9 फरवरी 2017 को पुन: चेक बाउंस हो गया। अधिवक्ता के माध्यम से उसे नोटिस भेजकर भुगतान करने को कहा गया, लेकिन आरोपी ने भुगतान नहीं किया।
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धनराशि का भुगतान न होने पर परिवादी ने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया। दलीलें और पत्रावलियों पर उपलबध्य साक्ष्य के आधार पर आरोपी खतेंद्र सिंह नेगी को दोषी पाते हुए एक साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।.
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