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केदारघाटी में विनाश लीला: बीते 9 दिनों की कहानी
रुद्रप्रयाग/ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jun 2013 07:05 PM IST
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केदारघाटी में विनाश लीला और उसके बाद राहत कार्य हो या अन्य घटनाएं। अमर उजाला ने मंदाकनी नदी के कहर की कहानी इसकी प्रत्यक्षदर्शी रहीं सुजया नेगी से सुनी।
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सुजया इसी जून माह में बच्चों की गर्मी की छुट्टी में चौरास से अपने मायके झोसी आई थी। झोसी गांव मंदाकिनी नदी के कहर से बर्बाद हो चुके सोनप्रयाग बाजार के सामने पड़ता है। उनकी जुबानी प्रस्तुत है नौ दिनों का घटनाक्रम।
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15 जून
शाम को भारी बारिश से मुंडकटिया और सोनप्रयाग के मध्य सोनप्रयाग माइक्रो हाइडिल पावर हाउस के सामने भूस्खलन हुआ। रात बारिश और तेज हो गई। लगभग नौ बजे नदी बढ़ी और सोनप्रयाग में बिड़ला गेस्ट हाउस ढह गया।
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16 जून
सुबह छह बजे मंदाकिनी नदी में तेज बहाव आया और देखते ही देखते सोनप्रयाग बाजार के निचले हिस्से को बहाकर ले गया। मैं पानी में बहते लोग, घोडे़-खच्चर, वाहनों और सिलेंडरों को देखकर विचलित हो गई। मन में किसी अनिष्ट की शंका हुई। मुझे लगा कि बाबा केदार ठीक कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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17 जून
मंदाकिनी नदी में छोटी सी झील बन चुकी थी। सोनप्रयाग और सीतापुर टापू बन गए। झील का पानी 40-50 वाहनों को लील गया। अपराह्न तीन बजे दर्शन लाल गैरोला ने अपने साथियों के साथ मिलकर पावर हाउस के ऊपर लकड़ी काटकर पुल बनाया। पुल से लगभग दो हजार लोगों को नदी पार करवाकर उनकी जान बचाई गई। गैरोला ने नदी में बह रहे लागों को जान हथेली पर रखकर बचाया। सात बजे तक लोगों को निकालने काम जारी रहा।
18 जून
सोनप्रयाग संगम के समीप पहाड़ी पर भूस्खलन हुआ। इसमें लगभग 20 लोग मारे गए होंगे। संगम के समीप फिर लकड़ी का पुल बनाया गया। जिससे लोगों को नदी पार कराई।
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19 जून
सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा जौरसी पहाड़ पर खाने के पैकेट गिराए जा रहे थे। लोग हेलीकॉप्टर देखकर उसकी ओर भाग रहे थे। लेकिन पैकेट पहाड़ी से नीचे गिर गए।
20 जून
झोसी में ग्रामीणों ने भंडारा लगाया। सैकड़ों लोगों को खाना खिलाया गया। सूचना मिली कि चौरी गंगाल के पीछे 20 लोग मारे गए हैं।
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21 जून
लगातार गांवों और जंगलों से यात्री निकल कर आ रहे थे। लगभग दो हजार लोगों को जंगल के रास्ते सुरक्षित निकाला गया।
22 जून
त्रियुगीनारायण के 20 और तोषी गांव के सात लोग इस आपदा में मारे गए। पूरे गांव में मातम का माहौल था। इसके बावजूद ग्रामीणों ने यात्रियों को अपने-अपने घरों में खाना खिलाया।
23 जून
आज फिर मुंडकटिया के निकट भूस्खलन हुआ। इसके नीचे सेना के जवानों सहित लगभग 100 लोग मौजूद थे। ऐसा लग रहा है कि कुछ लोग इसकी चपेट में आ गए हैं। घर से सोनप्रयाग देख रही हूं। पहले ना तो नदी दिखती थी और सोनप्रयाग बाजार। लेकिन अब यहां नदी दिखाई देने लगी हैं। जगह-जगह से रोने की आवाज कानों को काट रही है।