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पुराणों में कहीं भी असहिष्णुता शब्द का वर्णन नहीं: रामदेव
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sun, 10 Apr 2016 12:15 PM IST
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रामदेव
- फोटो : getty
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बाबा रामदेव ने कहा कि हमारे चारों वेदों उपनिषदों, रामायण, महाभारत और पुराणों में कहीं भी असहिष्णुता शब्द का वर्णन नहीं आता है। लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार इस शब्द को गढ़ कर इसका दुरुपयोग किया है।
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शनिवार को हरिद्वार में चंडीघाट स्थित दिव्य प्रेम सेवा मिशन की ओर से ‘असहिष्णुता एक मिथक’ विषय पर आयोजित व्याख्यान माला कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बाबा रामदेव ने यह कहा।
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इस दौरान वक्ताओं ने मीडिया पर जमकर प्रहार किए। आरोप लगाया कि मीडिया ने इसके लिए अपने 23 हजार घंटे बर्बाद किए। जबकि इस समय को वह सकारात्मक और जनहित की खबरों में लगा सकते थे।
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शाम करीब पांच बजे शुरू हुई व्याख्यान माला के मुख्य वक्ता सुदर्शन मीडिया ग्रुप के प्रमुख सुरेश चव्हाण के ने कहा कि आज मीडिया भारतीय त्यौहारों को बताना नहीं चाहता। यदि बताता है तो हीनभावना पैदा की जाती है।
असहिष्णुता पर ही मीडिया ने अपने 23 हजार घंटे बर्बाद किए। भारतीय मीडिया का रिमोट विदेशियों के हाथ में है। जबकि विदेशी भारत की महान परंपरा को नष्ट करना चाहते हैं। आज परिवार व्यवस्था पर अटैक किया जा रहा है। खाड़ी देशों का पैसा मीडिया में लग रहा है।
सेवा निवृत्त मेजर जनरल जीडी बक्शी ने श्रोताओं को राष्ट्रभक्त बनने का आह्वान करते हुए कहा कि विदेशियों ने भारतीयों की सहिष्णुता का गलत फायदा उठाया है। हम भारतीय उदार हैं कायर नहीं। इस चीज को विश्व वर्ष 1965 और वर्ष 1971 में हुए युद्ध में देख चुका है।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष आशीष गौतम, संयोजक संजय चतुर्वेदी, संयोजक मयंक भजोराम शर्मा, सह संयोजक संदीप गोयल ने व्याख्यान माला में पहुंचे अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर विधायक मदन कौशिक, विधायक आदेश चौहान, राजीव शर्मा, कुलदीप गुप्ता, कुंवर बृजेश सिंह, पीएन पाठक, दिग्विजय सिंह, अनिल भट्ट, अभिनव गोयल, अभिषेक गुप्ता, अजय शर्मा, अंकित गोयल, डा हिमांशु पंडित, कुलदीप भारद्वाज, मनोज तोमर, नवीन भट्ट, प्रेम शंकर पिंकी, बालकृष्ण शास्त्री, डा जितेन्द्र सिंह, अभयपाल सिंह, विश्वास शर्मा, प्रशांत खरे, अनिरूद्ध भाटी, प्रदीप कालरा आदि मौजूद रहे।