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चीन सीमा पर ड्रोन बेस बनाने के लिए जमीन की तलाश
अरुणेश पठानिया/देहरादून
Updated Sun, 28 Apr 2013 12:20 AM IST
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चीन की लद्दाख में भारतीय सीमा में घुसपैठ के बाद उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में सैन्य परियोजनाओं को लेकर सेना की चिंताएं बढ़ी हैं। राज्य में मानव रहित विमान (ड्रोन) बेस स्थापित करने की सैन्य योजना के लिए भूमि नहीं मिल रही है।
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पंतनगर एयरपोर्ट से सटे क्षेत्र में भूमि मिलने में हो रही देरी पर सेना ने शासन को दोबारा पत्र लिखा है। इससे पहले शासन ने पत्थरचट्टा सैनिक फार्म सुझाया था, लेकिन उसे सेना ने तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया था।
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उत्तराखंड के साथ चीन अधिकृत तिब्बत का लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर का सीमांत क्षेत्र है। सेना ने वर्ष 2012 में उत्तराखंड के सीमावर्ती पर्वतीय जनपदों में सर्विलांस के लिए ड्रोन विमानों का बेड़ा पंतनगर में तैनात करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया था।
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शासन ने सेना को सैनिक फार्म पत्थरचट्टा में भूमि सुझाई थी। जमीन के एयरपोर्ट से कई किलोमीटर दूर होने पर सेना ने उसे खारिज कर दिया। अब सेना ने सामरिक महत्व की परियोजना में हो रही देरी से दोबारा सरकार को पत्र लिखा है।
शासन ने मामले में कुमाऊं कमिश्नर को सैन्य अधिकारियों को वार्ता करने और भूमि चिह्नीकरण के निर्देश दिए हैं।
उत्तरकाशी में चाहिए फील्ड फायरिंग रेंज के लिए जमीन
सेना को मध्यम और हल्के दर्जे के तोपखाने के अभ्यास के लिए उत्तरकाशी में लगभग 50 वर्ग किलोमीटर में फील्ड फायरिंग रेंज स्थापित करने के लिए भूमि चाहिए। 10 वर्षों में सेना के पास फायरिंग रेंज 104 से घटकर 66 रह गई हैं, जिसमें मात्र 12 फील्ड फायरिंग रेंज अधिग्रहित हैं।
पर्वतीय क्षेत्र में आर्टिलरी अभ्यास के लिए उत्तराखंड के नंदादेवी और गंगोत्री दो क्षेत्र चिह्नित किए थे, लेकिन नंदा देवी बायोस्फेयर के बाद गंगोत्री में अब ईको सेंसिटिव जोन बनने से वन भूमि मिलने पर सवाल खड़े हो गए हैं।