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दूसरों की जान बचाने के लिए किया बेटे को कुरबान
देहरादून/ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jul 2013 08:41 PM IST
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उत्तराखंड आपदा में जिंदा बचे हुए लोग कई कड़वे और मीठे अनुभव लेकर घर लौट गए। इस दौरान पहाड़वासियों के प्रति नफरत फैलाने वाली खबरें भी चर्चा में आई और मदद में आगे रहे पहाड़वासियों के जज्बे की भी।
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आज एक ऐसे ही शख्स की बात फिर बता रहे हैं, जिसने पराए लोगों की जिंदगी का दामन पकड़ने के लिए अपने बेटे को कुरबान कर दिया।
केदारघाटी में 16 जून को जब लोग बदहवास होकर अपनी और अपने लोगों की जान बचाने के लिए दूसरों को धकेलते भाग रहे थे तो वहां एक शख्स ऐसा भी था, जिसने दूसरों को बचाने के लिए बेटे को कुरबान कर दिया। बेटे को छोड़ संग्राम सिंह ने छह लोगों को बचा लिया।
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केदारनाथ मंदिर के समीपवर्ती वठासु गांव के संग्राम सिंह को बेटे के खोने का गम तो है, लेकिन यह इत्मीनान भी है कि उन्होंने छह तीर्थयात्रियों की जिंदगी बचाई। बताते हैं कि बाढ़ का पानी मौत बनकर सबको निगलता जा रहा था।
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लहरों ने उनके बेटे योगेंद्र सिंह (17) को अपने घेरे में ले लिया। बचाने के लिए संग्राम ने बेटे का हाथ पकड़ लिया, तभी छह यात्री पानी में डूबते-उतराते बहे जा रहे थे, वे संग्राम सिंह को देख चिल्लाने लगे।
बेटे को छोड़ बचाई लोगों की जान
संग्राम सिंह ने बेटे का हाथ यह कहते हुए हाथ छोड़ दिया कि ‘बेटा तुझे तो बचा ही लूंगा, पहले इन्हें बचा लूं।’ संग्राम सिंह मुडे़ ही थे कि लहरों के झपट्टे ने योगेंद्र को निगल लिया।
संग्राम सिंह ने बेटे को खोकर भी धैर्य नहीं खोया और तीर्थयात्रियों को बचा लिया। आपदाग्रस्त क्षेत्रों से बचकर लौटे लखनऊ के विनोद कुमार, सोनभद्र के देवेश ने बताया कि क्षेत्रीय लोगों ने तबाही के वक्त बहुत से तीर्थयात्रियों को बचाया है।
अब बहुत ज्यादा मायने नहीं रह जाता कि आप आपदा के दौरान पहाड़वासियों को किस रूप में याद रखेंगे, क्या संग्राम सिंह के रूप में या उन हजारों ग्रामीणों के रूप में जो आज खुद भूखे हैं लेकिन उन्होंने आपको भूखा नहीं सोने दिया। यह आपको तय करना है।