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यहां हर साल लोगों को मिलता है 'खजाना'
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 18 Oct 2013 10:45 PM IST
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उन्नाव के किले में भले ही खुदाई के बाद भी खजाना मिले या ना मिले लेकिन हरिद्वार में प्रतिवर्ष निश्चित खजाने को तलाशने के लिए लोग उमड़ते हैं। यहां से कभी भी कोई खाली हाथ नहीं लौटता।
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हरकी पैड़ी और पंतद्वीप घाट पर इन दिनों खजाना ढूंढने वालों का जमावड़ा लगा हुआ है। इधर-उधर से काम छोड़कर आए मजदूर भी अपना भाग्य अजमाने के लिए हरकी पैड़ी का रुख कर रहे हैं।
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पिछले साल थोड़ा बहुत खजाना मिला
हरकी पैड़ी पर भीख मांगने वाले फक्कड़ बाबा भी पंतद्वीप घाट पर नदी से खजाना ढूंढने में जुट गए हैं। वर्ष भर सज्जनपुर पीली में रेत बजरी छानने के काम करने वाले चार युवा रोजाना सुबह आठ बजे हर की पैड़ी पर पहुंचकर खजाना ढूंढने में लग जाते हैं।
चारों के हाथ में लोहे की छोटी सी कुदाल होती है। यूपी के अलीगढ़ के रहने वाले कैलाश ने बताया कि वह तीन सालों हरकी पैड़ी पर खजाना ढूंढने के लिए आता है, पिछले साल थोड़ा बहुत खजाना मिल गया था, इस बार भी उम्मीद है कि कुछ न कुछ जरूर मिलेगा।
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खजाना ढूंढने में अपना भाग्य अजमा रहे
यूपी के फिरोजाबाद निवासी मुकेश, अलीगढ़ के हरिशंकर और मानक भी हरकी पैड़ी पर खजाना ढूंढने में अपना भाग्य अजमा रहे हैं। बताया कि खजाना मिलने पर उसे आपस में बांट लिया जाता है।
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इसमें यह बात पक्की होती है कि दिन की मजदूरी मिल ही जाएगी। फक्कड़ बाबाओं ने भी बताया कि वह भी काफी सालों से खजाना ढूंढते आ रहे हैं। पिछले साल काफी कुछ मिला था, इस बार भी जरूर मिलेगा।
क्या है ये खजाना
दरअसल गंगा क्लोजर के दौरान हर की पैड़ी क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बहुत कम हो जाने से लोग इस क्षेत्र में श्रद्घालुओं द्वारा गंगा को विसर्जित की गई सोने और चांदी की मूर्तियों समेत हीरे और सिक्के ढूंढते हैं। बड़ी संख्या में मजदूर इस दौरान हरिद्वार पहुंचते हैं और अपना भाग्य आजमाते हैं।