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हेमकुंड साहिब में तीन माह बाद हुई अरदास
अमर उजाला, जोशीमठ (चमोली)
Updated Mon, 23 Sep 2013 10:08 AM IST
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तीन माह से बंद पड़ी हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा रविवार को विधि-विधान से पहली अरदास के साथ शुरू हो गई।
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हेमकुंड साहिब पहुंचे श्रद्धालुओं ने ‘मैं आया दूरों चल के तक्की तौ शरणाई जियो’ के उद्घोष के साथ दरबार साहिब में मत्था टेका। पहले दिन करीब साढे़ चार सौ तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों ने पवित्र सरोवर में स्नान किया। यात्रा के दूसरे दिन करीब 300 तीर्थयात्रियों के जत्थे ने गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए अपनी पैदल यात्रा शुरू की।
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हिमाच्छादित सात शिखरों के मध्य 4329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब में 97 दिनों बाद एक बार फिर चहल-पहल देखने को मिली। चारों ओर से ‘जो बोले सो निहाल’ के जयकारों के बीच सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर हेमकुंड साहिब के कपाट खोले गए।
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पूर्वाह्न 11 बजे मुखवाक, साढे़ 11 बजे सुखमणी पाठ का शुभारंभ हुआ। दोपहर 12 बजे सबद कीर्तन शुरू हुआ। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति, भाव के आंसू झलक पडे़। श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की कुशलता की कामना के साथ हेमकुंड से विदा ली।
हेमकुंड साहिब में लंगर का आयोजन
गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की ओर से हेमकुंड साहिब में लंगर का आयोजन किया गया। उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा और गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के मैनेजर सेवा सिंह ने भी दरबार साहिब में मत्था टेका। इस मौके पर एसडीएम जोशीमठ एपी बाजपेई भी मौजूद थे।
25 सिख रेजीमेंट के जवान भी पहुंचे
हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा में सिख रेजीमेंट के 25 जवान भी शामिल हुए। जवान दो दिनों तक हेमकुंड साहिब में ही रहेंगे। गोविंदघाट गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रबंधक बूटा सिंह ने बताया कि आपदा को देखते हुए पांच सिख रेजीमेंट के पांच जवान यात्रा समाप्ति तक हेमकुंड साहिब में ही रहेंगे।
यह है मान्यता
मान्यता है कि जिस स्थान पर हेमकुंड साहिब तीर्थ स्थित है, वहां सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने तपस्या की थी। वर्ष 1933 में टिहरी के ग्रंथी संत सोबन सिंह ने इस स्थान की खोज की थी। इसके बाद अहोलदर बाबा मोदन सिंह ने यहां भव्य गुरुद्वारे का निर्माण कराया। श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के पास पवित्र सरोवर और लक्ष्मण मंदिर भी स्थित है।
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