एक और झटका खाकर हरीश रावत ने संभाल लिया कुनबा
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दल बदल पर कोर्ट के सख्त रुख के बावजूद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को एक और झटका मिल ही गया। कांग्रेस के नौ विधायकों की सदस्यता के समाप्त होने के बाद भी कांग्रेस की सोमेश्वर विधायक रेखा आर्या ने मंगलवार को अपनी विधायकी को दांव पर लगाने में कोई हिचक नहीं दिखाई। रावत के लिए सुकून रहा तो इतना कि यह झटका कांग्रेस के लिए सुनामी साबित नहीं हो पाया। बसपा से लेकर कांग्रेस के महाराज समर्थक कैंप के विधायकों ने आखिरकार रावत का ही साथ दिया।
रेखा आर्य के कांग्रेस से छिटक जाने का अंदाजा कांग्रेस को करीब तीन दिन पहले हो गया था। इतना होने पर भी फूंक-फूंककर कदम रख रहे कांग्रेस के रणनीतिकार इस बात को भांप नहीं पाए कि पहली बार विधायक बनी रेखा आर्या पार्टी का दामन तक छोड़ देंगी। कांग्रेस के एक विधायक के मुताबिक रेखा आर्य लगातार दून पहुंचने की बात करती रहीं और यह भी विश्वास दिलाती रहीं कि वह कांग्रेस के साथ ही हैं। सोमवार देर रात तक भी रेखा आर्य के न पहुंचने पर मान लिया गया था कि कांग्रेस को यह नुकसान हो चुका है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नजदीकी लोगों के मुताबिक ऐसे में रावत ने रेखा आर्या के मामले को मैनेज करने की बजाय बसपा और अन्य विधायकों पर ही फोकस किया। कांग्रेस ने पीडीएफ, निर्दलीय विधायकों के साथ ही महाराज समर्थक कैंप के विधायकों कोएक साथ रखा। हाल यह था कि कांग्रेस का यह कुनबा मंगलवार सुबह तक मसूरी में डटा रहा और मंगलवार सुबह ही ये विधायक दून पहुंचे। मसूरी में ही कांग्रेस के राज्य सभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद और पार्टी प्रभारी अंबिका सोनी ने विधायकों के साथ बात की।
रेखा आर्य के पाला बदलने से अब कांग्रेस को यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि यह सब इतना आसान नहीं है। रावत के लिए राहत की बात यह रही कि पूर्व संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश, विकासनगर विधायक नवप्रभात, राजपुर विधायक राजकुमार और पीडीएफ का उन्हें पूरा साथ मिला। यही वजह रही कि मसूरी में नवप्रभात, इंदिरा हृदयेश आदि सबसे बाद में पहुंचे।
एक बार पूर्व मंत्री यशपाल आर्य की नाराजगी भी सामने आई थी, पर आर्य को मनाने में रावत को खास मेहनत नहीं करनी पड़ी। दूसरी ओर भाजपा के हमले का जवाब देने के लिए रावत ने रुख दिल्ली की ओर ही रखा। रावत ने इस लड़ाई को कभी भी प्रदेश कांग्रेस बनाम प्रदेश भाजपा नहीं होने दिया। राष्ट्रपति शासन की खिलाफत के बहाने केंद्र के खिलाफ मोरचाबंदी ने कांग्रेस हाईकमान को रावत का साथ देने के लिए विवश किया।
दो और सदस्यों की सदस्यता पर संकट
मंगलवार को यह भी साफ हुआ कि प्रदेश में अब दो और सदस्य दल बदल कानून की चपेट में आने वाले हैं। नौ विधायकों की सदस्यता पहले ही समाप्त हो चुकी है। अब कांग्रेस की सोमेश्वर विधायक रेखा आर्या की सदस्यता पर भी संकट है। भाजपा के विधायक भीमलाल आर्य एक बार पहले दल बदल कानून की चपेट में आने से बच चुके हैं। इस बार उनका दल बदल की जद में आना तय है।
बहुमत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थी कांग्रेस
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
बहुमत को लेकर कांग्रेस पूरी तरह से आश्वस्त थी। कांग्रेस भवन में सुबह दस बजे से कार्यकर्ताओं में खुशी और उत्साह का माहौल था। 11.50 बजे कार्यकर्ता बहुमत साबित होने की एक दूसरे को बधाई देने लगे। सवा बारह बजे कांग्रेस भवन में तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई कि पार्टी विधानसभा में बहुमत साबित कर चुकी है।
सुबह दस बजे कांग्रेस भवन बड़े समारोह स्थल के रूप में नजर आ रहा था। परिसर में माइक, टेंट आदि की व्यवस्था की गई थी। सुबह से कार्यकर्ताओं का यहां पहुंचना शुरू हो गया था। कार्यकर्ताओं के बहुमत साबित होने को लेकर आश्वस्त होने का अंदाजा इसी बात से भी लगाया जा सकता है कि कांग्रेस सैनिक विभाग के अध्यक्ष कैप्टन बलवीर सिंह सुबह साढ़े दस बजे अपने कार्यालय में बैठकर निवर्तमान मुख्यमंत्री के लिए बधाई संदेश लिखते नजर आए।
वही कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने 11.50 बजे माइक से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जीत की बधाई दी। 12 बजे कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को अपने कंधों पर उठा लिया।
‘मोदी ये तो बता, उत्तराखंड को यू न सता’
कांग्रेस भवन में नेताओं ने जहां अपने भाषणों में केंद्र सरकार पर जमकर हमले बोले। वही महिला नेत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनाया गीत ‘मोदी ये तो बता उत्तराखंड को यू न सता’ प्रस्तुत किया।
बागियों पर बरसे कार्यकर्ता
कार्यक्रम में कुछ पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि कांग्रेस के बागी विधायकों को यदि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत या फिर किसी अन्य से कोई नाराजगी थी तो वे अपनी नाराजगी पार्टी हाईकमान के सामने रख सकते थे। कैप्टन बलवीर सिंह रावत ने कहा कि नाराजगी पर भाजपा की गोद में बैठना बागियों के लिए आत्मघाती कदम रहा।