हरीश का वन मैन शो बना संकट की वजह
- आज खुद की बेदखली होने से रोकना।
- 1977 में जोशी को राज्य से भेजा था बाहर।
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आपातकाल के जमाने से मुख्य धारा की राजनीति कर रहे हरीश रावत आज फिर राजनीतिक आपातकाल जैसे दौर से रूबरू हुए हैं। सवाल ये है कि उत्तराखंड में राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा राज्य में उपजे इस राजनीतिक संकट को भांपने में कैसे चूक गया।
दरअसल, बड़े कद का नेता होने के गुमान ने हरीश को इस संकट से मुखातिब कर दिया। कभी मुरली मनोहर जोशी को राज्य की राजनीति से बेदखल करने वाले हरीश रावत आज ऐसे मुकाम पर आकर खड़े हो गए है, जहां से उन्हें आज खुद की बेदखली होने से रोकना है।
हरीश रावत राज्य की ही नहीं बल्कि कांग्रेस की केंद्रीय राजनीति का भी बड़ा नाम है। 1977 में मुरली मनोहर जोशी को राज्य से तड़ीपार करने के बाद हरीश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हरीश को संकट के दौर से उबरना खूब आता है। 25 साल तक वह और उनका परिवार लोकसभा चुनाव हारता रहा, लेकिन उन्होंने जूझना नहीं छोड़ा, अंतत: वह अपना क्षेत्र छोड़कर हरिद्वार आए और जीतकर केंद्रीय मंत्री और फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने।
उन्हें राजनीतिक की बिसात पर शह-मात के खेल की खूब परख है, लेकिन यह घटनाक्रम उनके राजनीतिक कौशल पर एक सवाल छोड़ गया। शुक्रवार सुबह विजय बहुगुणा से वह बात भी करते रहे और फिर भी इस बात की भनक नहीं लगी कि शाम को क्या होने वाला है। सुबह से की जा रही सारी मेहनत डूबता सूरज लूट ले गया।
बड़े लीडर होने का गुमान ले डूबा हरदा को
कुल मिलाकर बड़े लीडर होने का गुमान इस सारे घटनाक्रम की वजह है। हरीश ने अब मान लिया था कि पार्टी और राज्य में उनका कद इतना ऊपर चला गया है कि उन्हें कोई टोकने वाला नहीं रहा। पिछले छह महीने से भी ज्यादा समय से वन मैन आर्मी की तरह सरकार चलाने का उनका रवैया कैबिनेट के सहयोगियों को नागवार गुजर रहा था। हरीश उस स्थिति को भांपने में भी कामयाब नहीं हुए।
हालांकि उन्हें सब जानकारी थी कि कैबिनेट के कुछ सहयोगी किसके साथ मिलकर क्या कर रहे है। फिर भी कोई प्रबंधन नहीं करना समझ से परे है। मंत्रीगणों में इतनी नाराजगी थी कि वह अब यह सोचने लगे थे कि उनका कोई भला हरीश राज में नहीं हो सकता और उनकी वजह से ही हरीश मुख्यमंत्री हैं।
हरक सिंह ने आज यह बात कही कि ‘नाम का मंत्री रहने से अच्छा है कि सरकार का हिस्सा ही ना रहो’। बस मंत्रियों और कांग्रेसियों की इस महत्वाकांक्षा भरी निराशा ने यह सब घटनाक्रम करने पर मजबूर कर दिया।