हरदा ने लगाई केंद्र से मदद की गुहार
- सीएम बोले, केंद्र की सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने को तैयार
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पिछले दो महीने में जो भी कुछ हुआ, उसके बाद केंद्र और राज्य के बीच रिश्तों में खटास पैदा हुई है। इसलिए केंद्र से आग्रह है कि कनफ्रंटेशन के बजाय को-ऑपरेशन का व्यवहार उत्तराखंड के साथ किया जाए।
उन्होंने कहा कि केंद्र को सूखे के मामले में उत्तराखंड के साथ भी यूपी और महाराष्ट्र जैसा बर्ताव करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने को-आपरेटिव फेडरलिज्म का जो सपना दिखाया था, उसका असर नहीं दिख रहा है।
बीजापुर गेस्ट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पिछले दिनों जो भी राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है, उसे किसी की हार या जीत के रूप में न देखा जाए, इसे केवल उत्तराखंड की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जो घाव मिले हैं, उन्हें भरने के लिए केंद्र की मदद जरूरी है।
केंद्र की सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड पूरी सहभागिता निभाएगा। जनधन योजना से लेकर स्वच्छ भारत अभियान तक उत्तराखंड केंद्र के साथ रहेगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र को भी कुछ मदद करनी होगी, भविष्य में जंगलों की आग पर काबू पाया जा सके, इसके लिए केंद्र से सौ करोड़ रुपये चाहिए। राज्य की आर्थिकी को केंद्र के सहारे की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मैं इसके लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए प्रयासरत हूं।
मंत्री होने का मतलब घोटाले में संलिप्तता नहीं : हरीश
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उनकी सरकार दुर्भावना से ग्रसित होकर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी। ढैंचा बीज खरीद प्रकरण पर उन्होंने विशेष तौर पर कहा कि विभाग का मंत्री होने का मतलब यह नहीं है कि वह आरोपी बन गया।
मामला तब गंभीर है जब फाइलों में गलत काम करने के लिए मंत्री की संलिप्तता साबित हो जाए। मैंने इस मामले की फाइल कई बार देखी है और विभाग से यही कहा कि अच्छी तरह से परीक्षण कर लो। इसी तरह से कुंभ घोटाला, हाइड्रो पावर, तराई बीज विकास निगम आदि मामलों में भी यही मानक होगा। किसी भी मामले में सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा।
और भी गम हैं जमाने में...
स्टिंग की जांच सीबीआई से वापस लेने के मामले में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि मंत्रिमंडल का फैसला संवैधानिक तौर पर ठीक है। जब उनसे पूछा गया कि यदि इस मामले की जांच सीबीआई ही कर लेती तो क्या हर्ज था, तो उन्होंने कहा कि सीएम के पास बहुत काम होते हैं, सीबीआई के झंझट से मुक्त होकर ही काम किया जा सकता है। और हंसते हुए कहा कि और भी गम हैं जमाने में मोहब्बत के सिवा। जांच हमारी एसआईटी ही कर लेगी, सीबीआई की जरूरत नहीं है।