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जमीन से जुड़ने पर बचा सकेंगे जल और जंगल: रावत
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मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत ने कहा कि जल और जंगल तभी बचा सकेंगे जब स्वयं जमीन से जुड़े रहेंगे। पर्यावरण संरक्षण कर पृथ्वी की प्यास बुझानी होगी।ताकि धरती पर जीवन भी बच सके। वे बुधवार को एसएमजेएन पीजी कॉलेज में उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं शोध केंद्र देहरादून और एसएमजेएन कॉलेज की ओर से आयोजित संयुक्त राष्ट्रीय कार्यशाला में बोल रहे थे।
बुधवार को आयोजित कार्यशाला में कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने सभी अतिथियों को हरित पौधा और गौरैया गृह भेंट किया। पर्यावरणविद प्रो. बीडी जोशी ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्रकृति की प्रत्येक वस्तु का संरक्षण करना चाहिए। जीवन की दिनचर्या में जल का उचित प्रयोग करके जल संरक्षण का किया जा सकता है। डीएवी कॉलेज के डा. पुष्पेंद्र शर्मा ने कहा कि जीवन की पूरी दिनचर्या ही जल से प्रारंभ होकर जल पर ही समाप्त होती है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के अरुणेश पाराशर ने कहा कि पृथ्वी पर जल की मात्रा दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। जल का संचय विभिन्न माध्यमों से किया जा सकता है।
कॉलेज के प्राचार्य डा. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि अगर जल का सही संचय नहीं किया गया तो यह सृष्टि के विनाश का कारण बन सकता है। इस मौके पर मदरहुड यूनिसर्विटी के अभिषेक स्वामी, डा. मन मोहन गुप्ता, डा. सरस्वती पाठक, डा. जगदीश चंद्र आर्य, डा. विनीता चौहान, डा. दीपा अग्रवाल, डा. मधु, डा. ऋचा चौहान, डा. धर्मेंद्र कुमार, रिंकल गोयल, डा. शिवकुमार चौहान, डा. मनोज कुमार सोही, डा. पदमावती तनेजा आदि मौजूद थे।
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बुधवार को आयोजित कार्यशाला में कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने सभी अतिथियों को हरित पौधा और गौरैया गृह भेंट किया। पर्यावरणविद प्रो. बीडी जोशी ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्रकृति की प्रत्येक वस्तु का संरक्षण करना चाहिए। जीवन की दिनचर्या में जल का उचित प्रयोग करके जल संरक्षण का किया जा सकता है। डीएवी कॉलेज के डा. पुष्पेंद्र शर्मा ने कहा कि जीवन की पूरी दिनचर्या ही जल से प्रारंभ होकर जल पर ही समाप्त होती है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के अरुणेश पाराशर ने कहा कि पृथ्वी पर जल की मात्रा दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। जल का संचय विभिन्न माध्यमों से किया जा सकता है।
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कॉलेज के प्राचार्य डा. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि अगर जल का सही संचय नहीं किया गया तो यह सृष्टि के विनाश का कारण बन सकता है। इस मौके पर मदरहुड यूनिसर्विटी के अभिषेक स्वामी, डा. मन मोहन गुप्ता, डा. सरस्वती पाठक, डा. जगदीश चंद्र आर्य, डा. विनीता चौहान, डा. दीपा अग्रवाल, डा. मधु, डा. ऋचा चौहान, डा. धर्मेंद्र कुमार, रिंकल गोयल, डा. शिवकुमार चौहान, डा. मनोज कुमार सोही, डा. पदमावती तनेजा आदि मौजूद थे।
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