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उत्पाती हाथियों की रेडियो कॉलर से होगी निगरानी

Tue, 01 Mar 2022 11:08 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 11:08 PM IST
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Violent elephants will be monitored by radio collar
उत्पाती हाथियों पर काबू पाने के लिए रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। इससे हाथियों के मूवमेंट की निगरानी की जा सकेगी। रेडियो कॉलर से हाथियों की लोकेशन मिलते ही न केवल उन्हें आबादी क्षेत्र में घुसने से रोका जा सकेगा।
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कनखल और पथरी क्षेत्र में हाथियों का मूवमेंट अधिक बढ़ रहा है। ये हाथी आए दिन गंगा पार करके कभी खेतों में पहुंच जाते हैं तो कभी आबादी क्षेत्र में धमक जा रहे हैं। हाथी किसानों कर गेहूं और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। स्थिति यह है कि किसान हाथियों से फसलों को बचाने के लिए रात में पहरा देने को मजबूर हैं। जबकि रात्रि में वन विभाग की टीम को अलग से गश्त करनी पड़ रही है। बावजूद इसके उत्पाती हाथी मौका लगते ही कहीं न कहीं से किसानों और गश्त टीम को चकमा देकर रिहायशी इलाकों में धमक जा रहे हैं। इससे निजात पाने के लिए अब वन विभाग की ओर से उत्पाती छह हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने के लिए रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी की जा रही है। रेडियो कॉलर लगाए जाने के लिए हाथियों को चिह्नित कर लिया गया है।
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रेडियो कॉलर लगने से उनकी लोकेशन का पता वन विभाग को चलता रहेगा। इससे उनके आबादी क्षेत्र की तरफ बढ़ते ही गश्त टीम मौके पर पहुंचकर उन्हें पहले ही वापस जंगल में लौटा दिया करेगी। रेडियो कॉलर की सहायता से यह भी पता चल जाएगा कि हाथियों का मूवमेंट किस तरफ है। ऐसे में संबंधित क्षेत्र के लोगों को भी समय रहते अलर्ट कर दिया जाया करेगा। संवाद
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दो दर्ज गांव हैं प्रभावित
शहर के कनखल क्षेत्र से लेकर पथरी के दो दर्जन से अधिक गांव हाथियों के उत्पात से प्रभावित हैं। जिसमें बिशनपुर कुंडी, शाहपुर, अजीतपुर, पंजनहेड़ी, रानीमाजरा, फेरूपुर, चांदपुर, बादशाहपुर, मिस्सरपुर, जियापोता आदि शामिल हैं।
चार हाथियों में से एक पर बचा रेडियो कॉलर
वन विभाग की ओर से पिछले साल हाथियों को रेडियो कॉलर लगाना शुरू किया था। चार हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाया गया था। हरिद्वार रेंजर दिनेश प्रसाद नौड़ियाल ने बताया कि इनमें से एक हाथी की मौत हो चुकी है। दो हाथियों का रेडियो कॉलर का पट्टा खुलकर कहीं गिर गया था। जिसमें एक पट्टा मिल गया था। अब एक ही हाथी पर रेडियो कॉलर लगा हुआ है।

आबादी क्षेत्र में हाथियों का अधिक मूवमेंट बढ़ रहा है। इसको देखते हुए छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। इससे हाथियों की लोकेशन का पता रहने से उन्हें रिहायशी इलाकों में आने से पहले ही जंगल में खदेड़ा जाएगा। - धर्म सिंह मीणा, डीएफओ, हरिद्वार
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