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उत्तराखंड और संस्कृत का रिश्ता पुराना
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 12 Nov 2016 10:08 PM IST
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Bhadrabad (Haridwar) Uttarakhand Sanskrit University in oriental studies at the All India conference on the launch of the lamp lighting governor Dakkeke Paul.
- फोटो : amarujala
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राज्यपाल डा. केके पॉल ने कहा कि उत्तराखंड और संस्कृत का रिश्ता हजारों वर्ष पुराना है। देवभूमि ऋषि-मुनियों की तप स्थली रही है। वैश्वीकरण के दौर में बुनियादी मूल्य कमजोर हो रहे हैं। युवा पीढ़ी भारतीय सभ्यता से दूर हो रही हैं। इससे देश कमजोर होने के साथ-साथ अखंडता को भी खतरा पैदा हो सकता है। युवा पीढ़ी भारतीयता के सिद्धांत न भूले इसके लिए संस्कृत को आगे बढ़ाना ही होगा।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और पतंजलि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को आयोजित 48वें अखिल भारतीय प्राच्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत के विद्वान सिर्फ अतीत के गौरव तक सीमित न रहें। बल्कि शोध पत्रों का निष्कर्ष भी आम लोगों तक पहुंचाए। देश के कोने-कोने और विदेशों से आए संस्कृत विद्वानों और शोध छात्रों का स्वागत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का आयोजन उत्तराखंड में हो रहा है।
शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि संस्कृत भाषा में वेदों और पुराणों की रचना देवभूमि उत्तराखंड में हुुई है। संस्कृत देववाणी होने के चलते उत्तराखंड और संस्कृत का संबंध और भी मजबूत हो जाता है। उन्होंने कहा कि शोध केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसे धरातल पर भी उतारा जाए। रुद्रप्रयाग में संस्कृत संस्थान खोलने में सहयोग के लिए उन्होंने केंद्र सरकार का धन्यवाद किया।
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पतंजलि विवि के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारतीय संस्कृति को बचाना है तो संस्कृत को बचाना ही होगा। संस्कृति रहेगी तो हम रहेंगे, नहीं तो हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। संस्कृत के संरक्षण और प्रचार प्रसार में जहां भी सहयोग की जरूरत होगी बाबा रामदेव समेत पतंजलि परिवार का पूरा साथ मिलेगा। तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में कई राज्यों से पहुंचे संस्कृत छात्र अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. पीयूषकांत दीक्षित ने राज्यपाल सहित अतिथियों का स्वागत किया। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने तीन दिवसीय सम्मेलन की रूपरेखा की जानकारी दी। पतंजलि विवि के प्रति कुलपति पी. कुलवंत, उत्तराखंड संस्कृत विवि के पूर्व कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल आदि ने भी विचार रखे। कार्यक्रम का सफल संचालन कुल अनुशासक डा. अरविंद नारायण मिश्र व डा. श्वेता अवस्थी ने किया। जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ, एसएसपी राजीव स्वरूप सहित पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी व गणमान्य समारोह में मौजूद रहे।
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उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और पतंजलि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को आयोजित 48वें अखिल भारतीय प्राच्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत के विद्वान सिर्फ अतीत के गौरव तक सीमित न रहें। बल्कि शोध पत्रों का निष्कर्ष भी आम लोगों तक पहुंचाए। देश के कोने-कोने और विदेशों से आए संस्कृत विद्वानों और शोध छात्रों का स्वागत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का आयोजन उत्तराखंड में हो रहा है।
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शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि संस्कृत भाषा में वेदों और पुराणों की रचना देवभूमि उत्तराखंड में हुुई है। संस्कृत देववाणी होने के चलते उत्तराखंड और संस्कृत का संबंध और भी मजबूत हो जाता है। उन्होंने कहा कि शोध केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसे धरातल पर भी उतारा जाए। रुद्रप्रयाग में संस्कृत संस्थान खोलने में सहयोग के लिए उन्होंने केंद्र सरकार का धन्यवाद किया।
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पतंजलि विवि के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारतीय संस्कृति को बचाना है तो संस्कृत को बचाना ही होगा। संस्कृति रहेगी तो हम रहेंगे, नहीं तो हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। संस्कृत के संरक्षण और प्रचार प्रसार में जहां भी सहयोग की जरूरत होगी बाबा रामदेव समेत पतंजलि परिवार का पूरा साथ मिलेगा। तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में कई राज्यों से पहुंचे संस्कृत छात्र अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. पीयूषकांत दीक्षित ने राज्यपाल सहित अतिथियों का स्वागत किया। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने तीन दिवसीय सम्मेलन की रूपरेखा की जानकारी दी। पतंजलि विवि के प्रति कुलपति पी. कुलवंत, उत्तराखंड संस्कृत विवि के पूर्व कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल आदि ने भी विचार रखे। कार्यक्रम का सफल संचालन कुल अनुशासक डा. अरविंद नारायण मिश्र व डा. श्वेता अवस्थी ने किया। जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ, एसएसपी राजीव स्वरूप सहित पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी व गणमान्य समारोह में मौजूद रहे।