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उजाला करने के लिए अंधेरगर्दी

Mon, 26 Dec 2016 12:14 AM IST
hridwar uttrakhanda india
hridwar uttrakhanda india Updated Mon, 26 Dec 2016 12:14 AM IST
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प्रदेश की नगर निकायों में सार्वजनिक पथ प्रकाश के लिए एलईडी लाइट्स खरीदने के मामले में मंत्री के आदेश पर कराई गई जांच में और भी ज्यादा अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में करोड़ों का गोलमाल सामने आया है। किसी भी नगर निगम व नगर पालिका ने शासन के नियमों और मानक का पालन नहीं किया है। उजाला करने के नाम पर यह अंधेरगर्दी प्रदेश केे नगर निकायों ने 13वें वित्त आयोग से जारी अनुदान धनराशि से एलईडी लाइटों की खरीद में बड़े स्तर पर की है।

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शिकायत के बाद शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार ने आठ अक्तूबर 2015 को सचिव शहर विकास को जांच कराने का आदेश दिया था। इस पर शासन ने निदेशक शहरी विकास निदेशालय को जांच कराकर जांच आख्या प्रेषित करने को आदेशित किया था। तत्कालीन निदेशक डा. पी. षणमुगम ने वरिष्ठ वित्त अधिकारी और अधिशासी अभियंता की दो सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने 21 जुलाई 2016 को निदेशालय को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी थी। शहरी विकास निदेशक एसए मुरुगेशन ने दो सदस्यीय जांच समिति की जांच रिपोर्ट को अगली कार्रवाई के लिए अपनी आख्या सहित सचिव शहरी विकास विभाग को 23 नवंबर को भेजा गया है।
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सूचना का अधिकार में मांगी जानकारी में एलईडी लाइट्स खरीद की जांच रिपोर्ट और निदेशक की ओर से निकायों के विरुद्ध कार्रवाई करने के आख्या पत्र से इसका पर्दाफाश हुआ है कि सभी निकायों ने बड़ा घोटाला किया है। सभी निकायों ने उपलब्ध मानक दर के सापेक्ष अधिक दर पर भुगतान किया है। इसकी पुष्टि जांच पड़ताल में हुई है। निदेशालय स्तर से निकायों की ओर से बरती गई अनियमितताओं और शासकीय धन की वसूली के लिए कारण बताओ नोटिस निर्गत किया जा चुका है।
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इनसेट
निकायों ने जांच में नहीं किया सहयोग
निदेशालय स्तर पर गठित जांच समिति के सदस्यों वरिष्ठ वित्त अधिकारी आनंद सिंह और अधिशासी अभियंता रवि पांडेय ने प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया कि एलईडी लाइट्स खरीद के संबंध में 19 बिंदुओं पर आख्या अभिलेख, विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध निकायों से किया गया लेकिन, सूचना प्राप्त नहीं होने पर निदेशक के स्तर से खेद प्रकट करते हुए 4 अप्रैल को अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया। प्रकरण के समाधान योजना के अंतर्गत संदर्भित होने के कारण पुन: द्वितीय अनुस्मारक पत्र नगर निगम काशीपुर, नगर पालिका परिषद मसूरी और नैनीताल को भेजा गया। अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने पर 8 निकायों से प्राप्त विवरण पत्रों के आधार पर जांच की गई।
इनसेट
समिति ने जांच आख्या में कहा
- एलईडी एक विशेष प्रकृति की मार्ग प्रकाश की लाइट है। इसकी तकनीकी स्वीकृति किसी सक्षम अधिकारी से ली जानी चाहिए थी। नगर निगम हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर और नगर पालिका परिषद मंगलौर, ऋषिकेश और मसूरी ने ऐसा नहीं किया।
- निविदा 2 बिड सिस्टम, तकनीकी व वित्तीय के आधार पर अनुबंधित की जानी चाहिए थी। काशीपुर, मंगलौर, मसूरी व नैनीताल ने निविदा 2 बिड पर सिस्टम के तहत आमंत्रित नहीं की।
- नगरपालिका मंगलौर, ऋषिकेश, मसूरी व नैनीताल ने उत्तराखंड अधिप्राप्त नियमावली 2008 का अनुपालन नहीं किया। नियमावली के मौलिक सिद्धांत पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा एवं निष्पक्षता का पालन नहीं किया गया।
-तकनीकी बिड के अंतर्गत एलईडी लाइट्स के तकनीकी रूप से सक्षम होने जैसे 9 मीटर पोल की ऊंचाई से मानक के अनुसार नगर के अंदर 15 लक्स का ल्यूमेन और हाईवे पर 30 लक्स का ल्यूमेन मिलने आदि की शर्त नहीं रखी गई। एलईडी आपूर्ति करने का फर्म से प्रमाणपत्र, लाइटों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लैब रिपोर्ट की शर्त रखी जानी चाहिए थी।
-निविदा सूचना को वेबसाइट से प्राप्त होने का प्रावधान होना चाहिए था। नगर निगम रुड़की, काशीपुर, नगर पालिका मंगलौर, ऋषिकेश व नैनीताल ने नगरपालिका कार्यालय से ही निविदा प्रपत्र विक्रय किए।
-उजाले के नाम पर अंधेरगर्दी का आलम यह है कि नगर निगम काशीपुर, नगरपालिका ऋषिकेश ने एलईडी लाइट्स के स्टोर में आने का पंजीकरण का विवरण तक जांच समिति को उपलब्ध नहीं कराया। जिससे यह भी पता नहीं चलता कि जितनी एलईडी खरीदनी दिखाई है उतनी स्टोर में आई भी या नहीं।
-जांच समिति ने पाया कि नगरपालिका मंगलौर ने 25 व 72 वॉट की एलईडी लाइटें ज्यादा दरों पर खरीदी हैं। नगरपालिक ऋषिकेश ने 72, 80 व 90 वॉट की एलईडी सामान्य से कहीं अत्यधिक दरों पर खरीदी गईं हैं। इसी प्रकार नगर पालिका मसूरी ने 20, 45, 60, 72 व 90 वॉट की एलईडी खरीदने में अंधेरगर्दी का रिकार्ड कायम किया है। नैनीताल व काशीपुर ने भी एलईडी की दरों के सापेक्ष अधिक दरों पर लाइटें क्रय की हैं।

-जांच समिति ने अंतिम पैरा में कहा कि उत्तराखंड अधिप्राप्त नियमावली 2008 के अनुसार प्रत्येक सरकारी कर्मचारी लोकधन से व्यय करते समय उसी प्रकार की सतर्कता बरतेगा जिस प्रकार एक सामान्य बुद्धिमान व्यक्ति निजी धन व्यय करते समय बरतता है, किंतु निकायों ने ऐसा नहीं किया है।

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